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सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी!.. काम के घंटे बढ़ाना अत्याचारी फैसला

-राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के वर्षगांठ कार्यक्रम में बोले महासचिव मोहिते

सामना संवाददाता / मुंबई

केंद्र की मोदी सरकार ने चार संहिता विधेयक पारित करके मजदूर आंदोलन के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है। राज्य सरकार ने जन सुरक्षा विधेयक पारित कर दिया है, वहीं काम के घंटे बढ़ाकर १२ घंटे करने का अत्याचारी फैसला लेकर मजदूर वर्ग पर अत्याचार किया गया है। एनटीसी मिल मजदूरों के मुद्दे पर सरकार ने पूरी तरह से आंखें मूंद ली हैं। अब समय आ गया है कि सरकार की इस मजदूर विरोधी नीति पर मंत्रियों या संबंधित विधायकों से जवाब मांगा जाए। ये बातें राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के महासचिव गोविंदराव मोहिते ने मजदूर सभा में कही।
राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ की ७९वीं वर्षगांठ पर परेल स्थित मनोहर फाल्के हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। विजयादशमी और संघ की वर्षगांठ राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ और महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ के संयुक्त तत्वावधान में समारोह आयोजित किए गए। संगठन के अध्यक्ष, विधायक सचिनभाऊ अहीर अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, महासचिव गोविंदराव मोहिते ने अपने भाषण में शुभकामनाएं दीं। अध्यक्ष विधायक सचिनभाऊ अहीर ने मजदूर वर्ग से अपनी संगठनात्मक ताकत को और मजबूत करने की अपील की है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के कोषाध्यक्ष निवृत्ति देसाई, उपाध्यक्ष रघुनाथ अन्ना शिरसेकर, बजरंग चव्हाण और सुनील बोरकर ने विचार रखे। कई पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के संस्थापक कामगार महर्षि के संगठन की स्थापना में योगदान और जिस साहस के साथ संगठन ने कई परिस्थितियों का सामना किया, उसके बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर राजन लाड, उत्तम गीते, जी.बी. उस समय गावड़े, मिलिंद तांबडे, शिवाजीकाले, साईकुमार निकम, किशोर रहाटे, भाऊसाहेब आंग्रे और अन्य उपस्थित थे।

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