इतिहास से छेड़छाड़ को लेकर सरकार आई निशाने पर
सामना संवाददाता / मुंबई
शैक्षणिक वर्ष २०२६-२७ के लिए कक्षा ३री की बालभारती पाठ्यपुस्तक में देश के महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी को कथित तौर पर कम आंकने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेशचंद्र राजहंस ने इस पर तीखा विरोध जताते हुए इसे इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की मनुवादी कोशिश’ करार दिया है और सरकार से इस गलती को तुरंत सुधारने की मांग की है।
कक्षा ३री की बालभारती की पाठ्यपुस्तक ‘द वर्ल्ड अराउंड अस पार्ट २’ (आपल्या सभोवतालचे जग – भाग २) में महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा स्थापित किए गए स्कूल का उल्लेख है। पुस्तक में इस स्कूल को सिर्फ ‘महाराष्ट्र का पहला लड़कियों का स्कूल’ बताया गया है। सुरेशचंद्र राजहंस के अनुसार, महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले ने १ जनवरी, १८४८ को पुणे के भिड़े वाडा में जो स्कूल शुरू किया था, वह न केवल महाराष्ट्र का, बल्कि पूरे देश का पहला लड़कियों का स्कूल था। कांग्रेस प्रवक्ता, सुरेशचंद्र राजहंस के अनुसार, फुले दंपति ने भारत में महिला शिक्षा की नींव रखी थी। इस ऐतिहासिक तथ्य के पक्के और अकाट्य सबूत मौजूद हैं। इसके बावजूद बालभारती की पुस्तक में इसे सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित रखना, इसके वैश्विक और राष्ट्रीय महत्व को जानबूझकर कम करने का प्रयास है। बालभारती की पाठ्यपुस्तक में दी गई इस गलत जानकारी को तत्काल सुधारा जाए और इसे ‘देश का पहला लड़कियों का स्कूल’ दर्ज किया जाए।
