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मजदूरी करके पत्नी को दिलाई नौकरी, बदले में मिला धोखा! …शिक्षिका बनते ही बीवी ने पति से पूछा- आप कौन हैं?

भरतपुर जिले के सलेमपुर खुर्द गांव में एक दिल को झकझोर देनेवाली कहानी सामने आई है। अनूप कुमार ने अपनी पत्नी पंकज कुमारी के सपनों को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत की। मजदूरी करके, पिता की फसल बेचकर, उन्होंने पंकज की बीएसटीसी की पढ़ाई और कोचिंग का खर्च उठाया। आखिरकार, पंकज सरकारी शिक्षिका बन गईं। लेकिन नौकरी मिलते ही उनका व्यवहार ऐसा बदला कि अनूप और उनका परिवार सदमे में है।
प्यार, मेहनत और विश्वास का सफर
अनूप और पंकज की शादी १४ नवंबर २०२१ को हुई थी। पंकज ने शादी के बाद पढ़ाई और सरकारी नौकरी की इच्छा जताई। अनूप ने इसे दिल से स्वीकार किया। मजदूरी से कोचिंग फीस, किराए का कमरा, खाने-पीने का खर्च और १०,५०० रुपए का मोबाइल फोन तक दिलाया और उसकी हर जरूरतें पूरी कीं। उनके पिता मोती लाल ने भी फसल बेचकर बेटे का साथ दिया। २०२३ में पंकज ने रीट की प्रथम लेवल शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की और रूपबास तहसील के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका बनीं।
सपनों के पीछे टूटा विश्वास
नौकरी मिलते ही पंकज का रवैया बदल गया। वह सास-ससुर के साथ अभद्रता करने लगीं और २ मई २०२५ को अनूप के साथ रहने से इनकार कर दिया। हैरानी की बात यह कि पंकज ने दस्तावेज सत्यापन में खुद को अविवाहित बताया। अनूप ने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की है और जांच की मांग की है। मोती लाल का कहना है, ‘हमने फसल बेचकर उनकी पढ़ाई करवाई, लेकिन अब वह हमें ही नहीं पहचानती।’
इंसाफ की उम्मीद
यह मामला अब अपर जिला न्यायाधीश के पास है। अनूप और उनके परिवार को इंसाफ की आस है। यह कहानी समाज के सामने सवाल खड़ा करती है-क्या मेहनत और विश्वास का यही इनाम मिलता है?

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