ईरान कनेक्शन वाले जहाज पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन
सुनील ओसवाल / मुंबई
ईरान से कथित तौर पर प्रतिबंधित ईंधन और बिटुमेन की तस्करी के आरोप में पकड़े गए जहाजों के मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने बड़ा पैâसला सुनाया है। अदालत ने ‘एमटी अल जाफजिया’ नामक संदिग्ध जहाज को गुजरात के अलंग शिपयार्ड ले जाकर तोड़ने की अनुमति दे दी है। इस पैâसले को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तस्करी नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है।
फरवरी में भारतीय तटरक्षक बल ने अरब सागर में संदिग्ध गतिविधियों के दौरान तीन जहाज- ‘एमटी अस्फाल्ट स्टार’, ‘एमटी स्टेलर रुबी’ और ‘एमटी अल जाफजिया’- को भारतीय समुद्री सीमा में रोककर बड़ी कार्रवाई की थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन जहाजों के जरिए ईरान से प्रतिबंधित बिटुमेन और ईंधन की अवैध सप्लाई की जा रही थी। कार्रवाई के बाद तीनों जहाजों को मुंबई के यलो गेट पुलिस स्टेशन के हवाले किया गया था।
मामले की सुनवाई मुंबई हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई, जहां जहाज मालिकों ने जहाजों को छोड़ने और अलंग शिपयार्ड ले जाने की अनुमति मांगी। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील विक्रम परशुरामी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और दो जहाज बेहद महत्वपूर्ण सबूत माने जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों ने अदालत में दावा किया कि यह सिर्फ साधारण तस्करी का मामला नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पैâले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। एजेंसियों को शक है कि समुद्री रास्तों का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित ईंधन और डामर भारत लाया जा रहा था। इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच
अदालत ने जांच की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल केवल ‘अल जाफजिया’ को अलंग शिपयार्ड ले जाने की अनुमति दी, जबकि बाकी दो जहाजों को लेकर कोई राहत नहीं दी गई। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहाज को हटाने से पहले भारतीय तटरक्षक बल और संबंधित विभागों से सभी जरूरी मंजूरियां लेना अनिवार्य होगा। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां अब जहाजों के मालिकों, कार्गो दस्तावेजों, समुद्री रूट और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि इस केस में आनेवाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
