धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में ‘नमो ब्रांडिंग’ के नाम पर चल रहे ‘सियासी खेल’ ने नया मोड़ ले लिया है। महायुति सरकार की नई ‘मोदी प्रीत’ पर्यटन योजना पर अब विवादों के बवंडर का दौर शुरू हो गया है। ‘नमो पर्यटन सूचना व सुविधा केंद्र’ योजना के तहत राज्य के चार ऐतिहासिक किलों को पर्यटन केंद्रों में बदलने की मंजूरी दी गई है। सरकार ने इस परियोजना के लिए २० करोड़ रुपए के पैकेज को तत्काल मंजूरी दे दी है। लेकिन विपक्ष ने इसे चुनाव पूर्व प्रचार स्टंट बताते हुए तीखा हमला बोला है।
आरोप है कि सरकार ‘नमो’ कार्ड खेलकर सियासी फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य की ऐतिहासिक धरोहरें राजनीति की बलि चढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि सरकार ने ७५ पर्यटन स्थलों के विकास का ब्लूप्रिंट तो तैयार कर लिया है, लेकिन पहले चरण में चुनिंदा किलों को ही प्राथमिकता दी गई है, जिससे राजनीतिक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने ‘नमो’ नाम के सहारे अब पर्यटन विकास में भी राजनीतिक दांव चला है। पर्यटन व सांस्कृतिक कार्य विभाग ने बुधवार को राज्य के चार ऐतिहासिक किलों प्रतापगढ़, रायगढ़, शिवनेरी और साल्हेर पर आधुनिक नमो पर्यटन सूचना व सुविधा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस परियोजना की जिम्मेदारी पर्यटन निदेशालय को सौंपी है। कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थीम-आधारित वास्तुकार और नामचीन ठेकेदारों के माध्यम से काम कराने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक परियोजना तीन वर्षों के भीतर पूरी की जानी है और मंजूर राशि से अधिक व्यय पर रोक लगाई गई है।
