मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाकैसे देश जगाएं हम

कैसे देश जगाएं हम

कैसे देश जगाएं हम।
कितना जोर लगाएं हम।।
जो सोए हैं उन्हें जगा कर ।
कैसे अब बैठाएं हम।।
बेकरी के इस मौसम में।
क्या कह कर चिल्लाएं हम ।।
सन्नाटा यह बोल रहा है।
किसको सत्य बताएं हम।।
देशभक्ति का गाना गाकर ।
किसको आज सुनाएं हम ।।
सब कुछ तो आयात हो रहा।
किस पर रोक लगाएं हम।।
पूंजी के बहते प्रवाह में।
कैसे जान बचाएं हम।।
धरती माता की सिसकन पर।
कितना कान लगाएं हम ।।
पागलपन हो गया भयानक ।
कितना किसे गिनाएं हम।।
प्रेम परस्पर भाईचारा।
किस दुनिया से लाएं हम ।।
मानवता जो मरी पड़ी है।
कैसे उसे जिलाएं हम ।।
दूर्दिन लाने वालों को अब ।
क्या कह कर समझाएं हम ।।
सोच रहे हैं भगत सिंह को ।
जल्दी यहां बुलाए हम।।
संयम पूर्वक आगे बढ़कर ।
शांति एकता लाएं हम।।
कैसे देश जगाएं हम।।
कितना जोर लगाएं हम।।

देश में जो चल रहा है

इस देश में जो चल रहा है
उसे देखने के लिए
संजय की नहीं
सीधे-सीधे जरूरत है ब्यास की।
जो दे सके आंख संजय को
और कह सके कि तुम देखो
और बताओ धृतराष्ट्र को
क्या हो रहा है,
क्या चल रहा है
तुम्हारे राज में।
आगाह करो और कह दो
अनर्थ हो रहा है।
जागने वाला देश सो रहा है।
कुछ तो है, जो गलत हो रहा है।
एक तुम्हीं हो जो घुमा सकते हो
दिमाग धृतराष्ट्र का
कर सकते हो कल्याण
हमारे इस अजीज राष्ट्र का।।
-अन्वेषी

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