गांव से अब मैं शहर आ गई
यहां की व्यस्त सड़कें और चलते लोग
अपने गंतव्य की ओर बढ़ते लोग
चिड़िया की चहचहाहट, कोयल की मीठी धुन,
अब तो शहरों की रफ्तार में सब गुम हो गए
क्यूंकि गांव से अब हम शहर आ गए!
यहां के लोग, यहां की बारिश
न गाओ जैसे मिट्टी की सुगंध
न ही पेड से गिरती बूंदे
सब अब बदल सा गया क्यूंकि
गांव से अब हम शहर आ गए!
“निशात रफी खान”
