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खाड़ी युद्ध का हिंदुस्थानी रियल इस्टेट पर असर … संकट में ५ लाख घरों का कब्जा! …मुंबई में २ लाख, पुणे में १ लाख घरों के निर्माण पर संकट

– अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में पड़ी बाधा
– सीमेंट, सरिया, ईंधन के भाव तेजी से बढ़े
सामना संवाददाता / मुंबई
खाड़ी युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अस्थिरता के बादल मंडरा रहे हैं। इस युद्ध का असर देश के रियल इस्टेट पर भी पड़ रहा है। इस वर्ष देश के आवास बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर घरों की बिक्री की उम्मीद थी, लेकिन खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने लाखों घर खरीदारों की उम्मीदों को झटका दिया है।
मौजूदा तनाव के कारण वैश्विक व्यापार, वस्तु बाजार और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। देश के सात प्रमुख शहरों में लगभग ५ लाख ४० हजार घरों के हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

७ प्रमुख शहरों में संकट बढ़ा
खाड़ी देशों में लंबे समय से जारी तनाव अब भारतीय अचल संपत्ति बाजार और आम घर खरीदारों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इस वैश्विक संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है और सीमेंट, सरिया तथा ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसके चलते सात प्रमुख शहरों में बड़ी संख्या में घरों का कब्जा सौंपने की योजनाओं को झटका लग सकता है।
खाड़ी युद्ध का बैड इफेक्ट
मुंबई और पुणे में बन रहे
५७ प्रतिशत घरों पर सीधा असर!

रियल इस्टेट एडवाइजर कंपनी अनारॉक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२१ से २०२३ के बीच शुरू हुई आवासीय परियोजनाएं अब निर्माण के अंतिम चरण में हैं। मगर खाड़ी युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक संकट का सबसे अधिक असर मुंबई महानगर क्षेत्र और पुणे के अचल संपत्ति बाजार पर पड़ने की संभावना है। इस वर्ष देश भर में प्रस्तावित कुल आवास निर्माण का ५७ प्रतिशत हिस्सा केवल इन दो शहरों में है। राहत की बात यह है कि संपत्तियों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है और पिछली मंदी की तुलना में इस बार परियोजनाओं के वित्तपोषण की स्थिति बेहतर है। इससे क्षेत्र को कुछ हद तक स्थिरता मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष केवल मुंबई में लगभग २ लाख ७ हजार ३०० घरों और पुणे में १ लाख ३०० घरों का हस्तांतरण किया जाना था, लेकिन अब इन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशील
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अचल संपत्ति क्षेत्र की आपूर्ति व्यवस्था बाहरी वैश्विक झटकों के प्रति हमेशा संवेदनशील रहती है। इसी कारण निर्धारित समयसीमा और वास्तविक कब्जा मिलने के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। अनारॉक रिसर्च के अनुसार, कोरोना काल में वर्ष २०२० के दौरान इन सात प्रमुख शहरों में लगभग ४ लाख ६६ हजार घरों का हस्तांतरण किया जाना था, लेकिन बंदी, श्रमिकों के पलायन और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण लक्ष्य का केवल ४६ प्रतिशत यानी करीब २ लाख १४ हजार घर ही सौंपे जा सके थे।

 

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