मुख्यपृष्ठस्तंभचीन में ‘निजी जिंदगी’ भी नहीं निजी!

चीन में ‘निजी जिंदगी’ भी नहीं निजी!

कैडरों पर शी जिनपिंग की नजर, तलाक से विदेश यात्रा तक शिकंजा

ई राज
वर्ष २०१२ में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद से चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के सदस्यों और सरकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन पर सरकार का नियंत्रण बेहद सख्त हो गया है। पहले जहां पार्टी का ध्यान मुख्य रूप से राजनीतिक निष्ठा तक सीमित था, वहीं अब तलाक, विदेश यात्रा और सामाजिक मेल-मिलाप जैसे निजी मामलों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
उदाहरणों से समझें यह निगरानी वैâसे काम करती है
तलाक और पारिवारिक पैâसले: यदि कोई पार्टी वैâडर या सरकारी कर्मचारी तलाक लेना चाहता है या दूसरा विवाह करना चाहता है, तो उसे इसकी पूरी जानकारी पार्टी के अनुशासन विभाग को देनी होती है। संपत्ति या व्यक्तिगत संबंधों को छिपाने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।
पासपोर्ट जब्ती और विदेश यात्रा: शिक्षकों, सिविल सेवकों और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के कर्मचारियों के पासपोर्ट जमा करवा लिए गए हैं। बिना पूर्व स्वीकृति के व्यक्तिगत छुट्टियों के लिए विदेश जाना लगभग असंभव है।
सामाजिक जीवन और मेल-मिलाप: अधिकारियों को निर्देश है कि वे निजी व्यवसायियों, विदेशी नागरिकों या गैर-सरकारी संगठनों के साथ अनौपचारिक बैठकों से बचें। ‘अनुचित प्रभाव’ या भ्रष्टाचार के संदेह से बचने के लिए उनकी डिनर पार्टियों और निजी नेटवर्क पर भी नजर रखी जाती है।
इस कड़े नियंत्रण का कारण और प्रभाव
शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का मुख्य उद्देश्य पार्टी को वैचारिक रूप से शुद्ध और पूरी तरह से अनुशासित बनाना है। नेतृत्व का मानना है कि अधिकारियों की अत्यधिक निजी आजादी से भ्रष्टाचार, पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
प्रभाव:
डर का माहौल: कड़े नियमों के कारण सरकारी अधिकारियों में लगातार जांच का डर बना रहता है।
काम में सुस्ती: सजा और निगरानी के डर से अधिकारी नए प्रशासनिक पैâसले लेने से हिचकते हैं।
शी जिनपिंग के शासन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के लिए सार्वजनिक कर्तव्य और निजी जीवन के बीच का अंतर पूरी तरह से खत्म हो चुका है।

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