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गया में एक भैंस के मालिकाना हक के  लिए आईजी ने डीएनए टेस्ट कराने का दिया निर्देश…फैसले का इंतजार किसी क्लाइमैक्स फिल्म से कम नहीं

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश के गया जिला अंतर्गत नीमचक बथानी अनुमंडल के अतरी थाना क्षेत्र में एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर उपजे अनोखे विवाद को सुलझाने के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने भैंस का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। दरअसल, यह पूरा मामला गया के अतरी थाना क्षेत्र के सेउतर गांव निवासी सूरज यादव और नौरंगा टोला निवासी प्रकाश मांझी दोनों ही एक ही भैंस पर अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। इस संबंध में बताया जाता है कि सूरज यादव की एक भैंस खो गई थी, जिसे उसने बाद में प्रकाश मांझी के घर बंधा हुआ देखा और वह उसे अपने साथ ले आया। इस बात से नाराज प्रकाश मांझी अतरी थाने पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस दोनों पक्षों के दावे के बीच उलझ गई और भैंस को थाने ले आई। इस बीच यह मामला अब मगध प्रक्षेत्र के आईजी और बिहार पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता रखने वाले विकास वैभव ने वैज्ञानिक जांच का आदेश दिया है। उनका कहना है कि इस जानवर बोल नहीं सकता और दोनों पक्षों के अड़ने के कारण असली मालिक का पता लगाने के लिए पुलिस अब आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक यानी डीएनए जांच का सहारा ले रही है। तब तक भैंस पुलिस की निगरानी में रहेगी।इस संबंध में मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने भैंस के वास्तविक मालिक का पता लगाने के लिए उसका डीएनए (DNA) टेस्ट कराने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में उन्होंने गया जी ग्रामीण एसपी दिव्यांजलि जायसवाल को इस मामले की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। जांच पूरी होने के बाद ही भैंस को उसके सही मालिक को सौंपा जाएगा।
वहीं इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने बताया मोहड़ा के सेउतर निवासी सूरज यादव की भैंस कुछ दिन पहले कहीं चली गई थी। यानी गुम हो गई थी। इस संबंध में उन्होंने काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसके कुछ दिनों बाद भैंस उपथू के महाचक गांव के नौरंगा टोली में दिखाई दी, जहां प्रकाश मांझी ने उसे अपने पास रख लिया।इस बीच जब सूरज यादव को जानकारी मिली कि उसकी भैंस नौरंगा में है, तो वह उसे खोजते हुए वहां पहुंचा। सूरज ने भैंस को अपनी बताते हुए थाने में चोरी का मामला दर्ज कराया। इसके बाद अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने बुलाया और शुरुआती कार्रवाई के बाद उसे सूरज यादव को सौंप दिया। इसके बाद मामले में उस समय विवाद और बढ़ गया, जब अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने का आरोप लगाया गया। आरोपों के बाद भैंस को दोबारा थाने बुलाया गया। कुछ दिनों तक भैंस थाने में रही।फिलहाल उसे फिर से सूरज यादव को सौंप दिया गया है। वहीं प्रकाश मांझी के पक्ष के लोगों का कहना है कि जिस भैंस को सूरज यादव अपना बता रहे हैं, वह करीब चार साल पहले उनकी भैंस चोरी हो गई थी।उनका दावा है कि भैंस को अपना घर पहले से पता था और इसी वजह से वह वापस नौरंगा लौट आई।इस बीच अतरी क्षेत्र में भैंस के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव और पुराना विवाद गहराता चला गया। अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने के आरोप भी लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा, ताकि मामले का निष्पक्ष समाधान निकल सके। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि डीएनए के बाद आखिर भैंस किसे मिलेगा। यह किसी क्लाइमैक्स फिल्म से काम नहीं है।

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