सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरपी से टली दर्दनाक कैंसर की वापसी
टाटा मेमोरियल सेंटर में हुआ अनुसंधान
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि कैंसर शोध के क्षेत्र में वह किसी से पीछे नहीं है। मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर के नेतृत्व में किया गया ऐतिहासिक बार्ट ट्रायल अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छा गया है। यह पहला मौका है जब हिंदुस्थान से किसी शोध अध्ययन को दुनिया के सबसे बड़े रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सम्मेलन एस्ट्रो के प्लेनरी सेशन के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि सिर्फ हिंदुस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए मील का पत्थर साबित हुई है।
मूत्राशय वैंâसर के इलाज में सर्जरी और कीमोथेरेपी के बावजूद हर तीन में से एक मरीज को कुछ सालों में कैंसर की दर्दनाक वापसी झेलनी पड़ती है। यह न केवल असहनीय पीड़ा देता है, बल्कि इलाज को भी बेहद कठिन बना देता है। लेकिन बार्ट ट्रायल ने साबित कर दिया कि आधुनिक और सटीक रेडिएशन थेरेपी सर्जरी के बाद दी जाए, तो इस दर्दनाक वापसी पर बिना किसी गंभीर साइड इफेक्ट के रोक लगाई जा सकती है।
इतिहास रचता देश
वर्ष २०१६ से २०२४ के बीच देश के चार बड़े वैंâसर केंद्रों में १५० से अधिक मरीजों पर किया गया यह अध्ययन दुनिया का सबसे बड़ा रैंडमाइज्ड ट्रायल है। यही वजह है कि अमेरिकी मंच पर हिंदुस्थान के शोध को प्लेनरी सेशन में जगह मिली, जहां अब तक केवल दुनिया की सबसे अहम खोजें ही जगह बना पाती हैं।
टाटा मेमोरियल की गर्जना
टाटा मेमोरियल सेंटर प्रधान अन्वेषक और प्रोफेसर डॉ. वेदांग मूर्ति ने कहा कि आधुनिक रेडिएशन तकनीकें मरीजों को वैंâसर की वापसी से बचा सकती हैं और उनका जीवन बेहतर बना सकती हैं। यह हिंदुस्थानी वैंâसर केंद्रों की एकजुट मेहनत का नतीजा है। टीएमसी के निदेशक डॉ. सुदीप गुप्ता ने कहा कि यह हिंदुस्थान की ऐतिहासिक जीत है। अब दुनिया मानेगी कि हिंदुस्थानी शोध सिर्फ हिंदुस्थान ही नहीं, पूरी दुनिया के मरीजों के लिए उम्मीद बन सकता है।
हिंदुस्थान से उठी किरणें, रोशन होगा विश्व
इस ट्रायल के नतीजे सिर्फ हिंदुस्थान तक सीमित नहीं रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध अब वैश्विक वैंâसर उपचार प्रोटोकॉल को भी बदल सकता है।
