फिरोज खान
बिहार के समस्तीपुर की रहनेवाली रजनी (बदला हुआ नाम) का विवाह राजू से होने के बाद दोनों के बीच सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद राजू को शराब पीने की लत लग गई। शराब के नशे में रजनी संग गाली-गलौज करने के साथ ही राजू अब उसे पीटने भी लगा था। राजू की इस हरकत को रजनी सिर्फ यह सोचकर बर्दाश्त करती रही कि एक दिन राजू सुधर जाएगा। लेकिन सुधरने की बजाय राजू की क्रूरता इस कदर बढ़ी कि वो रजनी को दूसरे मर्दों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने लगा। रजनी को सब कुछ मंजूर था, लेकिन दूसरे मर्दों के साथ हमबिस्तर होना पसंद नहीं था। रजनी जब ऐसा करने से मना करती तो राजू उसे मारने-पीटने लगता। एक दिन बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने घर आए टीचर हरि ने जब रजनी के चेहरे की बदली रंगत के बारे में पूछा तो रजनी ने अपने बच्चों के टीचर से सारी हकीकत बयां कर दी। हरि ने रजनी के साथ हमदर्दी दिखाते हुए न केवल उसके आंसू पोंछे, बल्कि रजनी को दवाइयां भी लाकर दी। यह हमदर्दी धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। खैर, एक रात शराब के नशे में घर पहुंचे राजू ने पत्नी के साथ सेक्स करने के कुछ ही देर बाद जब दोबारा सेक्स करने की कोशिश की तो रजनी ने इंकार कर दिया। इसके बाद राजू ने गुस्से में रजनी को पीटना शुरू किया। राजू के अत्याचारों को ६ सालों से सहनेवाली रजनी के सब्र का बांध अब टूट गया और उसने चाय बनानेवाली केतली से राजू के सिर पर जोरदार वार कर दिया। केतली के वार से राजू के बेहोश होते ही रजनी ने हरि को बुला लिया और दोनों मिलकर राजू को पीटते रहे। पीटने के बावजूद जब राजू की मौत नहीं हुई तो बिजली का तार राजू की गर्दन में लपेटकर उसे करंट के जोरदार झटके दिए। आखिरकार, राजू ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। पति की हत्या के बाद रजनी के मन में न कोई डर था न पछतावा। मर्डर करने के बाद भी उसके अंदर गुस्से की आग इस कदर थी कि पति की लाश के सामने ही उसने अपने प्रेमी हरि के साथ काफी देर तक सेक्स किया। गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने जब पूछताछ की तो दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
