फिरोज खान
एक दिन अचानक रंजीत की नजर गायत्री से टकराई और वह उसकी ओर खिंचता चला गया। वह उससे बात करने के लिए मौके की तलाश में था। एक दिन मोबाइल की दुकान पर उसे मौका मिल गया, जहां गायत्री अपना मोबाइल रीचार्ज कराने आई थी। उससे बात की शुरुआत करने का कोई बहाना चाहिए था। लिहाजा, उसने गायत्री से कहा, `देखें तुम्हारा मोबाइल, किस कंपनी का है।’ गायत्री ने उसके हाथ में सीधे मोबाइल दे दिया। रंजीत हाथ में मोबाइल लेकर देखते हुए बोला, `यह मोबाइल तो तुम्हारी तरह ही स्मार्ट है।’ गायत्री ने उसे घूरकर देखा, फिर खिलखिलाकर हंसते हुए बोली, ‘तुम भी काफी स्मार्ट लगते हो।’ पहली बार किसी लड़की ने उसकी दोस्ती कबूल की थी। रंजीत और गायत्री के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोनों ही लोगों की नजरों से छिपकर मिलने लगे, लेकिन लाख छिपाने पर भी ऐसी बातें छिप नहीं पातीं। गांव में दोनों को लेकर खुसुर-फुसुर होने लगी। दोनों ने तय किया कि अब वे बाहर नहीं, बल्कि रात में गायत्री के मकान में मिलेंगे। रंजीत ने प्रेमिका से मिलने का एक उपाय खोज लिया। उसने वैâमिस्ट से नींद की गोलियां खरीदकर गायत्री को देते हुए कहा कि वह रात के खाने में कुछ गोलियां मिला दिया करे, फिर दोनों बेखौफ होकर मिला करेंगे। गायत्री ने अब रात का खाना बनाने की जिम्मेदारी ले ली। इसके बाद वह जब अपने प्रेमी से मिलने का प्रोग्राम बना लेती तो खाने में नींद की गोलियां मिला देती। पूरा परिवार गोलियों के असर से गहरी नींद में सो जाता। दूसरी ओर रंजीत और गायत्री कमरे में प्यार में डूबे रहते और रातभर शारीरिक संबंध बनाते। सुबह होने से पहले रंजीत वहां से निकल जाता। एक दिन गायत्री की मां की रात को अचानक से नींद खुल गई। उसे कुछ शक हुआ तो वह गायत्री के कमरे के पास गई, तो उसे बातचीत करने की आवाज सुनाई दी। मां ने कमरे की खिड़की का पल्ला धीरे से हटाकर देखा तो हैरान रह गई। गायत्री और रंजीत दोनों नग्न अवस्था में थे। गुस्से में आकर मां ने शोर मचाया तो रंजीत कमरे के दूसरे दरवाजे से भाग गया। घरवालों ने गायत्री की पिटाई कर दी। इसके बाद गायत्री के लिए रिश्ते की तलाश होने लगी। आखिर उन्होंने गायत्री की शादी संजीव से करके राहत की सांस ली। ससुराल में गायत्री का मन नहीं लग रहा था। वह प्रेमी रंजीत से मिलने के लिए बेकरार रहने लगी। एक दिन गायत्री ने तय किया कि संजीव से छुटकारा पाने के बाद ही वह प्रेमी से बेखौफ मिलती रहेगी। इस बारे में उसने रंजीत से बात की। दोनों ने तय किया कि संजीव को ठिकाने लगाकर वे कहीं दूर जाकर दुनिया बसा लेंगे। गायत्री अपने पति संजीव के साथ डॉक्टर को दिखाने के बहाने मोटरसाइकिल पर सवार होकर एटा के लिए निकली। उसने अपने एटा जाने की सूचना प्रेमी दे दी। रंजीत अपने दोस्त राजेश के साथ रिजौर से एटा पहुंच गया। गायत्री ने पानी की बोतल में नींद की गोलियां मिला रखी थीं, जिनकी वजह से संजीव को नींद आने लगी तो उसने मोटरसाइकिल रोक दी। संजीव वहीं नींद के आगोश में निढाल होकर गिर पड़ा। गायत्री ने मौका पाकर चाकू से पति का गला रेत दिया। रंजीत भी वहां पहुंच चुका था। रंजीत ने अपने दोस्तों की मदद से लाश को ठिकाने लगाया और फरार हो गया। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों दिल्ली भाग जाना चाहते थे, पर पैसों का भी इंतजाम करना था। इससे पहले कि वे एटा छोड़ पाते पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
