मुख्यपृष्ठस्तंभतहकीकात : ब्लाइंड मर्डर का बढ़ता खतरा...मौत को हादसा-आत्महत्या दिखाने का खेल!

तहकीकात : ब्लाइंड मर्डर का बढ़ता खतरा…मौत को हादसा-आत्महत्या दिखाने का खेल!

-फिरोज खान

-ऐसे मामलों से समाज को भी सतर्क रहने की जरूरत
हत्या के बाद लाश छोड़कर फरार हो जाना और पुलिस को गुमराह करने के लिए मौत को आत्महत्या या हादसा बताने की कोशिश करना अब अपराधियों के लिए नया हथियार बनता जा रहा है। तेलंगाना के पेड्डापल्ली में २० वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा की मौत का मामला इसका खौफनाक उदाहरण है। छात्रा की मौत को शुरुआत में आत्महत्या माना गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोप लगाया कि पूर्व लेक्चरर ने उसे जबरन कीटनाशक पिलाया और फिर आत्महत्या का रूप देने के लिए उससे सुसाइड नोट लिखवाया। सीसीटीवी, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूर्व लेक्चरर को गिरफ्तार किया गया।
यह मामला सवाल खड़ा करता है कि आखिर कितनी आसानी से हत्या को आत्महत्या या हादसे का रूप देकर जांच को भटकाने की कोशिश की जा सकती है। मुंबई में भी पुलिस के सामने अज्ञात शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मुंबई पुलिस की वेबसाइट पर वर्ष २०२६ में कई ऐसे अज्ञात शवों के मामले दर्ज हैं, जिनमें मृतकों की पहचान तक नहीं हो सकी है। २०२६ में महाराष्ट्र के एक मामले में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल तब उठे, जब एक महिला को मृत मानकर उसके पिता और भाई को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन बाद में वही महिला जीवित सामने आ गई। राज्य सरकार ने इसे पुलिस की गंभीर गलती माना और कार्रवाई के आदेश दिए।
सावधानी ही सुरक्षा है
ब्लाइंड मर्डर के मामलों में पुलिस के लिए हर सुराग महत्वपूर्ण होता है, लेकिन आम नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। अनजान लोगों पर भरोसा न करें, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें और किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने को मामूली मामला समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर सूचना, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूत किसी अपराध की गुत्थी सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

अन्य समाचार