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ईरान की शातिर चाल…अमेरिका हैरान परेशान… जमीन के नीचे दफन तबाही, बारूद का पहरा… पूरी दुनिया की सांसें अटकी

संतोषी रावत

फिल्म शोले में जेलर बने असरानी का एक फेमस डायलॉग था, ‘सुरंग मेरे जेल में सुरंग…’ दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह हिटलर के पैरोडी अंदाज में उनका डायलॉग दर्शकों को बरबस हंसने के लिए मजबूर कर देता था। लेकिन ईरान ने स्वयंभू महाशक्तिमान ट्रंप को छका देने के लिए यूरेनियम के भंडार के आसपास जो बारूदी सुरंगें बिछाई हैं उससे अमेरिका कपालभाति करने लगा है बेशक जिसका असर दुनिया भर में पड़ रहा है।
खतरनाक और अत्यधिक संवेदनशील यूरेनियम का एक विशाल भंडार, जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बनी अंधेरी सुरंगें और उन सुरंगों के मुहाने पर बिछी घातक बारूदी सुरंगें। यह किसी हॉलीवुड फिल्म का सीन नहीं, बल्कि मध्य पूर्व के सबसे बड़े परमाणु संकट की ताजा और खौफनाक हकीकत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी सैन्य चेतावनी के बाद ईरान ने एक ऐसा आत्मघाती और चौंकाने वाला कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के गलियारों से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि ईरान ने अपने बम बनाने योग्य यूरेनियम के जखीरे को दुनिया की नजरों से हमेशा के लिए ओझल कर दिया है। जिन भूमिगत सुरंगों में यह संवेदनशील परमाणु सामग्री रखी गई थी, ईरान ने खुद उन्हें ब्लास्ट करके ढहा दिया है। इतना ही नहीं, मलबे के नीचे दफन हो चुके इन ठिकानों के प्रवेश द्वारों पर ऐसी बारूदी सुरंगें बिछा दी गई हैं कि अब वहां कदम रखना भी मौत को दावत देने जैसा है।
यह सब उस वक्त हुआ जब वॉशिंगटन में यह चर्चा जोरों पर थी कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी सेना को ईरान के इन परमाणु ठिकानों पर हमला कर यूरेनियम भंडार को अपने कब्जे में लेने का गुप्त आदेश दे सकते हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए थे कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। अमेरिका की रणनीति इस समृद्ध यूरेनियम को जब्त करने की थी, लेकिन ईरान की इस जवाबी किलेबंदी ने व्हाइट हाउस के रणनीतिकारों को चक्रव्यूह में फंसा दिया है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले ही बंद है और वहां युद्ध के नगाड़े बज रहे हैं। इस बीच ईरान के इस कदम ने अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सामने एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी है जिसे भेदना नामुमकिन है। दोनों देश एक ऐसे समझौते के बेहद करीब थे जिसके तहत करीब ५०० किलोग्राम बम-ग्रेड यूरेनियम को नष्ट कर देश से बाहर ले जाना था। लेकिन अब जब ठिकाने ही मलबे और बारूद के ढेर में तब्दील हो चुके हैं, तो सवाल उठता है कि इस जानलेवा मलबे को साफ कौन करेगा और जमीन के नीचे दफन उस तबाही को सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाएगा।
शातिर कूटनीतिक चाल
परमाणु मामलों के विशेषज्ञ इसे ईरान की एक बेहद शातिर कूटनीतिक चाल भी मान रहे हैं। अगर भविष्य में कोई लिखित समझौता होता भी है और ईरान से अपना पूरा यूरेनियम सौंपने को कहा जाता है, तो वह बड़ी आसानी से हाथ खड़े कर देगा। वह दावा कर सकता है कि ध्वस्त सुरंगों के कारण कुछ हिस्सा बाहर निकालना अब उसके बस में भी नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया कभी यह जान ही नहीं पाएगी कि क्या ईरान ने सचमुच अपना पूरा परमाणु भंडार सौंप दिया है, या फिर भविष्य की किसी जंग के लिए बारूद के नीचे एक नया खौफनाक राज छिपा रखा है।

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