सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई, पुणे समेत पूरे राज्य में करोड़ों की जमीनें कौड़ियों के भाव में हड़प ली जा रही हैं। इन सभी जमीन सौदों पर श्वेतपत्रिका जारी की जाए और आगामी शीतकालीन अधिवेशन में इस पर पूरे दिन चर्चा की जाए। ऐसी मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है।
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में सपकाल ने भाजपा-महायुति सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने पुणे की ४० एकड़ महार वतन की जमीन ३०० करोड़ रुपए में खरीदी और इसके लिए केवल ५०० रुपए का मुद्रांक शुल्क भरा। उस जमीन पर आईटी पार्क बनाने का प्रस्ताव भी तुरंत मंजूर किया गया और दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया।
भाजपा के केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे में जैन बोर्डिंग की जमीन हड़प ली, जब यह मामला सामने आया तो सौदा रद्द कर दिया गया, लेकिन यह प्रकरण अभी खत्म नहीं हुआ है।
अडानी को सैकड़ों एकड़ जमीन मुफ्त में दी
मुंबई में अडानी को सैकड़ों एकड़ जमीन मुफ्त में दी गई। भाजपा के मुंबई कार्यालय के लिए सरकारी जमीन का जो सौदा हुआ, वह भी सवालों के घेरे में है। फडणवीस ने अपने नए साथी मोहित कंबोज को एसआरए की जमीनें दीं। पुणे में रिंग रोड के अधिग्रहण में बड़ा घोटाला हुआ।
समृद्धि महामार्ग में किसकी ‘समृद्धि’ हुई, यह जनता को बताने के लिए जमीन सौदों को लेकर श्वेतपत्रिका जारी की जाए।
एफआईआर में पार्थ पवार का नाम क्यों नहीं?
सकपाल ने कहा कि पार्थ पवार की ‘अमेडिया’ कंपनी ने पहले पुणे के बोपोडी इलाके में एग्रीकल्चर डेयरी की सरकारी जमीन फर्जी दस्तावेज बनाकर हड़प ली थी। इस सभी सौदों के लिए पैसे कहां से आए? यह रकम एक चीनी कारखाने से आई तो ये पैसे किसने और वैâसे दिए? जनता को इन सवालों के जवाब मिलने चाहिए। जांच समिति बनाकर सरकार सिर्फ समय जाया कर रही है।
