सामना संवाददाता / मुंबई
कई वर्ष बीत जाने के बाद भी मध्य रेलवे कुर्ला-सीएसएमटी के बीच पांचवी और ६ठी लाइन का काम पूरा करने में असमर्थ रही है। वहीं अब मध्य रेलवे का कहना है कि अब परेल व सीएसएमटी के बीच सिर्फ पांचवी लाइन का काम पूरा किया जा सकता है यानी साफ है कि ६ठी लाइन का काम फंसा हुआ नजर आ रहा है। रेलवे का कहना है कि जमीन अधिग्रहण की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, सीएसएमटी से परेल तक ट्रैक बिछाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि छठी लाइन इस हिस्से में संभव नहीं है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को अलग करना था, जिससे उपनगरीय सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकता था। अप्रैल २०२५ में वैâग ने इस देरी पर नाराजगी जताई थी, क्योंकि जनवरी २०२४ तक ही ५००.९३ करोड़ रुपए (५६.२२प्रतिशत) खर्च हो चुके थे, जबकि काम मुश्किल से शुरू हो पाया था। यह परियोजना दो चरणों में बंटी है, पहला चरण परेल से कुर्ला (१०.१० किमी) और दूसरा चरण परेल से सीएसएमटी (७.४ किमी)। फिलहाल, रेलवे ने पहले चरण पर ध्यान देने का निर्णय लिया है। कुर्ला से कल्याण के बीच पांचवीं और छठी लाइनें पहले से मौजूद हैं, जिन्हें अब परेल तक बढ़ाना है।
कुर्ला स्टेशन पर काम जटिल
कुर्ला स्टेशन पर सीधी अलाइनमेंट के लिए हार्बर लाइन का मौजूदा ट्रैक हटाना और प्लेटफॉर्म को ऊंचाई पर बनाना आवश्यक है। यह काम जटिल है और यहीं पर परियोजना सबसे अधिक अटकी हुई है। सायन ब्रिज और नई स्टेशन बिल्डिंग पर काम जारी है, लेकिन माटुंगा क्षेत्र में प्रोजेक्ट प्रभावित लोगों का पुनर्वास अभी तक बड़ी चुनौती बना हुआ है। रेलवे का कहना है कि पुनर्वास की लेटलतीफी के लिए एमएमआरडीए जिम्मेदार है।
लागत भी बढ़ने की संभावना
परेल-कुर्ला के बीच ७१४ और परेल-सीएसएमटी के बीच ५५० परिवारों का पुनर्वास किया जाना है। इस परियोजना की शुरुआती लागत ८९०.८९ करोड़ रुपए तय हुई थी, जिसे रेलवे मंत्रालय और राज्य सरकार ५०:५० अनुपात में साझा कर रहे थे, लेकिन समयसीमा लगातार बढ़ने से लागत भी बढ़ने की संभावना नजर आ रही है।
