उमा सिंह
जयपुर में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। मंच पर रेल मंत्री मौजूद थे, बगल में ऊर्जा मंत्री बैठे थे, सामने वैâमरे खटाखट फोटो ले रहे थे, पीछे सत्ताधारी दल का भव्य मुख्यालय खड़ा था और चारों ओर विकास के दावों की चमक बिखरी हुई थी। बस एक छोटी-सी चीज `मिसिंग’ थी, और वह थी बिजली! जिस राज्य में ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में किसी सरकारी कार्यक्रम के दौरान तीन बार बिजली गुल हो जाए, उसे महज संयोग मानना उतना ही कठिन है, जितना बिजली विभाग का बिल समझना। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अंधेरे में भाषण देते रहे और श्रोता मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में `मोदी के विकास’ की बातें सुनते रहे। संभव है संदेश यही रहा हो कि देश इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, कितनी तरक्की कर रहा है, इत्यादि, लेकिन इस बीच बेसिक बिजली का यूं मिसिंग रहना अपने आप में बड़े सवाल खड़े करता है। या यूं कहें विकास के दावों की पोल भी खोलता नजर आता है। इस बीच सबसे दिलचस्प दृश्य तो तब बना जब ऊर्जा मंत्री व्यवस्था का जायजा लेने बाहर निकल गए। लोग असमंजस में थे कि मंत्री जी बिजली ढूंढ़ने गए हैं या बिजली मंत्री जी को ढूंढ़ रही है।
सरकार अक्सर दावा करती है कि वह देश को रोशनी की ओर ले जा रही है। लेकिन जयपुर के इस कार्यक्रम ने मानो उस दावे का उल्टा प्रदर्शन कर दिया। यहां रोशनी से अंधेरे की यात्रा का सीधा प्रसारण देखने को मिला। कार्यक्रम रेल परियोजनाओं के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन सारी सुर्खियां बिजली अपने नाम कर ले गई। आखिर जनता भी क्या करे? जब बिजली ही कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बन जाए, तो बाकी सब लोग मेहमान ही लगते हैं न..! जयपुर का यह अंधेरा भले कुछ मिनटों का रहा हो लेकिन यह अपने पीछे एक बड़ा गहरा सवाल छोड़ गया है। यदि सत्ता के सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण मंच पर बिजली व्यवस्था का यह हाल है, तो जरा सोचिए, आम लोगों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता होगा? लेकिन छोड़िए भी… यह ‘विश्वगुरु’ और ‘विकास’ के दावों का दौर है। यहां अंधेरे भी उपलब्धि बन सकते हैं और बिजली कटौती भी प्रतीक। इसलिए कह सकते हैं-मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में विकास सचमुच गजब ही दिखाई देता है!
