शीतल अवस्थी
वैसे तो हिंदुस्थान में हर त्योहार पर महिलाएं श्रृंगार करती हैं, परंतु जब बात करवा चौथ की आती है, तो सुहागिनों का उत्साह ही अलग होता है। इस दिन वे पूरा सोलह श्रृंगार करती हैं, पार्लर जाती हैं, मेहंदी लगवाती हैं और विशेष परिधान व गहनें पहनती हैं। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है लेकिन इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर होता है। सार तो सभी का एक होता है पति की दीर्घायु। इसीलिए सुहागिनों के लिए यह व्रत काफी अहम है, लेकिन सही विधि से इसे न कर पाने की वजह से कई बार इसका अपेक्षित फल प्राप्त नहीं हो पाता।
आज-कल देखा गया है कि कई कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ का व्रत रखती हैं, पर असल में यह व्रत केवल सुहागिनों के लिए ही होता है। देश के कुछ क्षेत्रों में कुंवारियों के यह व्रत रखने की परंपरा जरूर है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुहागिनें अपनी मां या अपनी सास से करवा चौथ का महत्व व विधि सीखती आई हैं। जिसमें सबसे अहम करवा चौथ की आवश्यक संपूर्ण पूजन सामग्री को व्रत से पहले ही एकत्रित करने की सीख दी जाती रही है। व्रत के दिन ब्रम्हमुहूर्त में स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें-
`मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर
श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।
फिर सास द्वारा भेजी गई सरगी खाएं। इसमें मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-शृंगार का समान होता है। ध्यान रहे इसमें प्याज-लहसुन न हो। पूरे दिन निर्जला रहकर शिव-पार्वती व गणेशजी का ध्यान करती रहें। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि बड़ी पुरानी परंपरा है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं। फिर पीली मिट्टी से मां गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं। गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का शृंगार करें। जल से भरा लोटा रखें। वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं। गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें और इस मंत्र का जाप करें-
नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।।
पति की दीर्घायु की कामना करें। करवा पर १३ बिंदी रखें और गेहूं या चावल के १३ दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें। कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें। तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें। रात्रि में चंद्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें। ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। हर क्षेत्र के अनुसार पूजा करने का विधान और कथा अलग-अलग होता है। इसलिए कथा में काफी ज्यादा अंतर पाया गया है।
