उमेश गुप्ता / वाराणसी
काशी और नेपाल का रिश्ता सदियों पुराना है। नेपाल में राजतंत्र के दौर में राजा-रानी राज्याभिषेक से पहले काशी आकर गंगा स्नान और बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करते थे। यही पुराना रिश्ता आज भी दोनों क्षेत्रों के बीच जुड़ाव का आधार बना हुआ है। काशी में बाढ़ की स्थिति की जानकारी मिलते ही नेपाली समाज के लोगों ने फोन कर नेपाल में रह रहे अपने परिचितों और परिजनों से संपर्क कर हालचाल लिया।
शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी और नेपाली समाज वाले इलाकों के जनप्रतिनिधि भी समाज के लोगों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी लेते रहे। काशी में नेपाली कोठी, काठ की हवेली और नेपाली मंदिर आज भी नेपाली संस्कृति और परंपरा के प्रमुख प्रतीक हैं। एक समय मंगलागौरी, दुग्ध विनायक और ब्रह्मा घाट का इलाका बड़ी संख्या में नेपालियों की मौजूदगी के लिए जाना जाता था। बताया जाता है कि नेपाल के राजपरिवार से जुड़े लोग भी यहां रहते और शिक्षा ग्रहण करते थे। कोईराला परिवार के लोग भी काशी में रहे हैं।
काशी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती से पूर्व नेपाल बाढ़ में दिवंगत आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि साथ ही घायलों के जल्द स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई।
इस दौरान गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी सचिव हनुमान यादव समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
