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परंपरा और धर्म की आड़ में प्रकृति की हत्या … ये भक्त नहीं, वन-विनाशक सरकार!

‘तपोवन’ में पेड़ों की कटाई पर भड़का विपक्ष
सामना संवाददाता / मुंबई
नासिक में ‘तपोवन’ की हरियाली पर चल रही आरी को लेकर राजनीति चरम पर है। कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर १,८०० पेड़ों की बलि चढ़ाने की योजना पहले ही विवादों में है। ऐसे में अब खुद सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान ने आग में घी डाल दिया है। फडणवीस ने साफ कहा कि तपोवन की जमीन नहीं मिली तो कुंभ वैâसे होगा? इस तरह उन्होंने लगभग उसी भाषा को दोहराया, जिसे लेकर कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन पहले से ही कटघरे में थे। विपक्ष ने इसे तुरंत लपक लिया और सरकार पर सीधा वार करते हुए कहा कि यह भक्तों की नहीं, वन-विनाशक सरकार है, जो परंपरा और धर्म की आड़ में प्रकृति की हत्या कर रही है।
नासिक में कुंभ मेले के दौरान साधुओं के रहने की व्यवस्था के लिए तपोवन में साधु ग्राम बनाया जाना है, जिसके लिए प्रशासन ने १,८०० पेड़ काटने की योजना बनाई है। पर्यावरण प्रेमियों की ओर से हो रहे विरोध के बावजूद कुंभ मेला मंत्री महाजन का इस वृक्ष कटाई को आशीर्वाद है। हालांकि, अब तक मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी राय नहीं रखी थी। लेकिन अब उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि आम तौर पर पेड़ कटाई टालनी चाहिए। इस बारे में किसी को कोई मतभेद नहीं हो सकता। लेकिन सिर्फ इस मुद्दे पर जो राजनीति की जा रही है, वह गलत है।
नहीं की वैकल्पिक जमीन की तलाश
तपोवन की वृक्ष कटाई पर विपक्षी दलों ने जमकर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्यावरण की कीमत पर फायदा उठाना चाहती है। सरकार ने पिछले १० साल में वैकल्पिक जमीन की तलाश ही नहीं की। यह पूरी योजना अवैज्ञानिक और जन-विरोधी है। विपक्ष ने यह भी कहा कि प्रयागराज का कुंभ १५,००० हेक्टेयर में जरूर होता है, लेकिन पेड़ों को काटकर नहीं। महाराष्ट्र सरकार की अक्षमता का यह सबूत है कि उन्हें कुंभ के लिए सिर्फ पेड़ काटने वाली जमीन ही दिख रही है।

प्रयागराज का कुंभ १५,००० हेक्टेयर में जरूर होता है, लेकिन पेड़ों को काटकर नहीं। महायुति की अक्षमता का यह सबूत है कि उन्हें कुंभ के लिए सिर्फ पेड़ काटने वाली जमीन ही दिख रही है।

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