सामना संवाददाता / मुंबई
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) इंडिया ने मशहूर अभिनेत्री, निर्माता और उद्यमी कृति सेनन को अपनी मानद लैंगिक समानता राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की। यह घोषणा मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में हुई, जहां महिलाओं और लड़कियों के सशक्तीकरण और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के संयुक्त संकल्प को रेखांकित किया गया। अपने नए दायित्व में सेनन महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और कल्याण के लिए आवाज उठाएंगी। वह लड़कियों की शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, लैंगिक हिंसा को समाप्त करने और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने जैसे अहम मुद्दों पर अपना समर्थन देंगी।
कार्यक्रम से पहले कृति सेनन ने लैंगिक समानता के चार साहसी युवा समर्थकों के साथ मिलकर यह संकल्प लिया कि वह बाल विवाह, लिंग आधारित भ्रूण चयन, वेतन असमानता, नुकसानदायक सामाजिक मान्यताओं और महिलाओं व लड़कियों के खिलाफ हिंसा जैसी बाधाओं को दूर करने में अपनी आवाज बुलन्द करेंगी। भारत अब भी लैंगिक पूर्वाग्रह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, जहां बेटे की प्राथमिकता और सामाजिक मान्यताएं महिलाओं और लड़कियों के अवसरों को सीमित करती हैं।
कार्यक्रम में कृति सेनन ने अपने संकल्प को व्यक्त करते हुए कहा कि मैं यूएनएफपीए इंडिया की मानद लैंगिक समानता राजदूत के रूप में जुड़कर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं। यह भूमिका महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों व विकल्पों की वकालत करने का अद्भुत अवसर है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने निर्णय खुद ले सकें, अपने सपने पूरे कर सकें और हिंसा व भेदभाव से मुक्त जीवन जी सकें। मैं हर महिला और लड़की को सशक्त बनाने, उनकी आवाज़ को बुलंद करने और उनके अनुभवों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।
यूएनएफपीए इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोज्नार ने कृति सेनन का स्वागत करते हुए कहा कि हम कृति सेनन का मानद लैंगिक समानता राजदूत के रूप में स्वागत करके बेहद उत्साहित हैं। उनकी प्रभावशाली आवाज, जुनून और व्यापक पहुंच हमारे संदेश को और मजबूत बनाएगी, खासकर युवाओं तक। महिलाओं और लड़कियों के अधिकार, अवसर और सुरक्षा को आगे बढ़ाने में कृति की प्रतिबद्धता यूएनएफपीए के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाती है।
यूएनएफपीए एशिया और प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक पियो स्मिथ ने कृति सेनन की नियुक्ति पर बधाई देते हुए कहा कि कृति सेनन का यूएनएफपीए इंडिया की मानद लैंगिक समानता राजदूत बनना एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका प्रभाव भारत की सीमाओं से कहीं आगे तक है और उनकी आवाज एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गूंजेगी, जहां करोड़ों महिलाएं, लड़कियां समान अधिकारों और अवसरों के लिए प्रयासरत हैं।
