-जरांगे को कहा ‘जीआर पूरा’, भुजबल को कहा अधूरा
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण पर नई रार शुरू हो गई है। आरक्षण के लिए मनोज ने अनशन किया तो सरकार ने उनकी ८ में से ६ मांगें मान लीं। मराठा-कुणबी सर्टिफिकेट को लेकर सब कमेटी ने अहम फैसला लिया। सरकार के पैâसले के बाद ओबीसी नेताओं में नाराजगी का माहौल देखा गया। ऐसे में मुख्यमंत्री ने मंत्री छगन भुजबल से भी बात की। उन्होंने मराठा और ओबीसी को अलग-अलग चूरन देकर शांत करा दिया है।
सूत्रों की मानें तो मराठा समाज के आंदोलनकारियों को फडणवीस ने कहा कि जीआर पूरा है, लेकिन जो दो मांगे बाकी हैं, उन्हें दो महीने बाद पूरा करने का आश्वासन दिया है, वहीं नाराज ओबीसी नेताओं को मनाने के लिए भुजबल से फडणवीस ने बात की और उन्होंने कहा कि मराठाओं को दिया गया जीआर परिपूर्ण नहीं है। वह अभी प्रूफ के तौर पर दिया गया है, फाइनल नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आखिर किसे धोखा दे रहे हैं? आरक्षण को लेकर मराठा व ओबीसी समाज दोनों के बीच में फंसे फडणवीस दोनो को चूरन दे रहे हैं, ऐसा सूत्रों का दावा है।
भुजबल से बात करने के बाद फडणवीस ने मराठा आरक्षण के जीआर को लेकर मीडिया से बात की और ओबीसी की नाराजगी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह सामान्य आरक्षण का जीआर नहीं है, बल्कि यह प्रूफ का जीआर है। मराठवाड़ा के सबूत हैदराबाद गजट में हैं इसलिए इसे इसमें शामिल किया गया। जो लोग वास्तव में आरक्षण के हकदार हैं, उन्हें आरक्षण मिलेगा। ओबोसी समाज को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
फडणवीस ने कहा कि मैंने छगन भुजबल से फोन पर बात की है। कोई वैâबिनेट छोड़कर नहीं गया है, सारे लोग वैâबिनेट का हिस्सा हैं। मुझे लगता है कि हमने जो किया है, उसे ओबीसी के नेता समर्थन देंगे। हमने जो जीआर निकाला है, उसका ओबीसी पर असर नहीं होगा। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने भी हमारे जीआर को देखने के बाद कहा है कि इससे ओबीसी पर कोई असर नहीं होगा।
