– स्वास्थ्य विभाग ने साध रखी है चुप्पी
– मिलें मनपा अधिकारी वर्ना आंदोलन तय
सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा के मैटरनिटी होम में कर्मचारियों का सब्र टूट चुका है, क्योंकि यहां एक ‘लेडी डॉन’ की तरह व्यवहार करनेवाली नर्स लगातार उनका मानसिक उत्पीड़न कर रही है। गाली-गलौज, धमकियां और तानाशाही रवैये से परेशान स्टाफ की शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है। इससे कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि यूनियन ने साफ अल्टीमेटम जारी किया है कि सोमवार को मनपा अधिकारी बैठक में उपस्थित हों, वर्ना मजबूरन हमें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। दूसरी ओर लगातार हो रहे अपमान, दुर्व्यवहार और प्रशासन की उदासीनता ने मैटरनिटी होम का वातावरण विषाक्त बना दिया है। ऐसे में अब कर्मचारी न्याय और कार्रवाई के लिए आर-पार की लड़ाई को तैयार हैं।
नाहुर स्थित मनपा सुषमा स्वराज प्रसूति गृह में कार्यरत कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले डेढ़-दो वर्षों से एक ही स्टाफ नर्स की ‘तानाशाही’ और ‘अभद्र’ व्यवहार से त्रस्त कर्मचारियों ने अब खुलकर अपनी आवाज उठाई है। मुंबई म्युनिसिपल वर्कर्स यूनियन ने इस मानसिक उत्पीड़न और गाली-गलौज की शिकायत को लेकर सीधे चिकित्सा अधिकारी को एक तीखा पत्र लिखा है, जिसमें नर्स के तत्काल तबादले की मांग की गई है।
अभद्रता की हदें पार
यूनियन द्वारा भेजे गए पत्र में साफ आरोप लगाया गया है कि नर्स ने प्रसूति गृह के कर्मचारियों के लिए एक आतंक जैसा माहौल बना दिया है। यूनियन के अनुसार, नर्स का कर्मचारियों को गाली देना, दुर्व्यवहार करना और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करना नित्य का नियम बन गया है। पत्र में यहां तक कहा गया है कि वो ऐसे शब्दों का बार-बार उपयोग करती हैं, जिनका उल्लेख हम इस पत्र में भी नहीं कर सकते।
पद का दुरुपयोग
आरोप है कि नर्स अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लेकर धमकी देती है। मामूली बातों पर विवाद खड़ा करती है और ईर्ष्यावश अकारण ही मेमो जारी कर कर्मचारियों को परेशान करती है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका व्यवहार ऐसा है जैसे वे उनके निजी सेवक हों। इस ‘तानाशाही’ के कारण कर्मचारियों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके दैनिक कार्य प्रदर्शन पर हो रहा है। यूनियन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नर्स का व्यवहार अब सहनशीलता की सीमा से बाहर जा चुका है और कर्मचारियों में भारी चिड़चिड़ाहट व असंतोष उत्पन्न हो गया है।
कंटेनर में ओपीडी
कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न के अलावा यूनियन ने सावित्रीबाई फुले प्रसूति गृह के पुनर्विकास के मनपा के पैâसले पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पुनर्विकास के बावजूद स्टाफ को उसी जर्जर परिसर के कंटेनर में ओपीडी चलाने का आदेश दिया गया है। यूनियन ने इसे कर्मचारियों और नागरिकों दोनों के लिए ‘अकारण कठिनाइयों’ का सामना करनेवाला पैâसला बताया है। यूनियन की मांग है कि सावित्रीबाई फुले प्रसूति गृह के सभी कर्मचारियों को निकटस्थ सुषमा स्वराज प्रसूति गृह की इमारत में पूर्व की भांति स्थानांतरित किया जाए, ताकि नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
