मुख्यपृष्ठनए समाचारसीखना व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति की कुंजी-कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, सीयूएसबी

सीखना व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति की कुंजी-कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, सीयूएसबी

-सीयूएसबी में इग्नू बीएड कार्यशाला-एक का उद्घाटन

अनिल मिश्र / पटना

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने इग्नू (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू)) क्षेत्रीय केंद्र, पटना के सहयोग से बीएड कार्यशाला-एक के उद्घाटन समारोह के साथ बीएड प्रशिक्षुओं के नए बैच का स्वागत किया गया | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह उपस्थित रहे और उन्हें शिक्षक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मितांजलि साहू ने सम्मान-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। प्रो रवि कांत, भूतपूर्व डीन एवं विभागाध्यक्ष, शिक्षक शिक्षा विभाग ने ओरिएंटेशन कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया और प्रशिक्षुओं को इस कार्यशाला का उपयोग अपने विकास और शिक्षण कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए एक मंच के रूप में करने के लिए प्रोत्साहित किया। अपने मुख्य संबोधन में, प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रभावशाली विचार साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सीखना व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति की कुंजी है, यह विचार उनके ‘ज्ञान शक्ति’ और ‘सरस्वती धाम’ के संदेश में निहित है। प्रो. सिंह ने शिक्षा की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा करते हुए कहा कि सीखना केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने शिक्षार्थियों के भीतर बौद्धिक जिज्ञासा, नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। कुलपति महोदय ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को केवल कक्षाओं और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने एक ऐसी शैक्षिक प्रणाली की परिकल्पना की, जो सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास, चरित्र निर्माण, समावेशिता और जीवन भर सीखते रहने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे। कुलपति महोदय के ‘ज्ञान शक्ति’ के संदेश ने इस विश्वास को रेखांकित किया कि ज्ञान व्यक्ति को बाधाओं को पार करने, सही निर्णय लेने और समाज में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाता है। इसी तरह, ‘सरस्वती धाम’ की परिकल्पना सीखने, ज्ञान, सांस्कृतिक समृद्धि और बौद्धिक प्रबुद्धता के एक पवित्र स्थान का प्रतीक है, जहाँ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से मौजूद हैं। इन सशक्त विचारों के माध्यम से, प्रो. सिंह ने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे शिक्षण पेशे के सर्वोच्च आदर्शों को बनाए रखें, युवा मनों को प्रेरित करें, और ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील तथा प्रबुद्ध नागरिकों का निर्माण करें जो राष्ट्र-निर्माण और एक प्रगतिशील तथा समावेशी भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हों।इस संबंध में दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यशाला में एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने अपना परिचय दिया और अपने संस्थानों के बारे में बताया। कार्यशाला के अंत में डॉ. नृपेन्द्र वीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ |

अन्य समाचार