मुख्यपृष्ठस्तंभपॉलीटिका मतभेद रहें, मनभेद नहीं!

पॉलीटिका मतभेद रहें, मनभेद नहीं!

राजनीति में मतभेद होना लाजिमी है, पर मनभेद का जहर लोकतंत्र को दीमक की तरह चाट जाता है।

एमएमएस

भारतीय राजनीति में जब अमूमन तलवारें खिंची होती हैं, तब तमिलनाडु के गलियारों से आई एक तस्वीर ऑक्सीजन का काम कर रही है। ११ मई २०२६ को नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच हुई मुलाकात केवल एक फोटो-ऑप नहीं, बल्कि गिरते राजनीतिक मूल्यों के बीच एक सुखद अपवाद है।
कहते हैं कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इसे दुश्मनी की हद तक ले जाया गया है। ऐसे में दलपति विजय का शपथ ग्रहण के तुरंत बाद स्टालिन से मिलना और स्टालिन द्वारा उन्हें शॉल ओढ़ाकर बधाई देना, लोकतांत्रिक परिपक्वता का बेहतरीन उदाहरण है। जहां आज के दौर में विपक्ष को शत्रु मानकर उसे ट्रोल करना सत्ता पक्ष का मुख्य शगल बन गया है, वहां स्टालिन का विजय को लोकतांत्रिक शुरुआत की बधाई देना एक ठंडी फुहार जैसा है। पिछले १४ वर्षों में देश की राजनीति में एक निराशाजनक शून्य उभरा है। विपक्ष की बातों को अनसुना करना और स्वस्थ बहस के बजाय निजी हमलों का सहारा लेना अब न्यू नॉर्मल बन गया है। इस शोर-शराबे के बीच तमिलनाडु ने दिखाया है कि विचारधारा की जंग, व्यक्तिगत सम्मान के आड़े नहीं आनी चाहिए। विजय के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं। अभिनेता से नेता बनने की राह में वैâमरा तो उनके साथ है, लेकिन अब उन्हें वैâबिनेट और जन-आकांक्षाओं के बीच संतुलन बिठाना है। दूसरी ओर, स्टालिन एक मंझे हुए खिलाड़ी के रूप में विपक्ष की भूमिका में होंगे।
लोकतंत्र की गाड़ी तभी चलती है जब सत्ता और विपक्ष के पहिए एक-दूसरे का सम्मान करें। यदि विजय और स्टालिन इसी शिष्टाचार और शुचिता को बरकरार रखते हैं, तो यह भारतीय राजनीति के लिए एक नया व्याकरण होगा।
राजनीति में मतभेद होना लाजिमी है, पर मनभेद का जहर लोकतंत्र को दीमक की तरह चाट जाता है। उम्मीद है कि यह शॉल और सौहार्द का सिलसिला केवल वैâमरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नीतियों और विकास की चर्चा में भी झलकेगा। यदि ऐसा होता है, तो तमिलनाडु की यह जोड़ी वाकई देश के लिए एक ऐसी मिसाल कायम करेगी, जहां संविधान का मान और विपक्ष का सम्मान ही सर्वोपरि होगा। तमिलनाडु की राजनीति में शिष्टाचार की नई बयार से राजनीति के चाणक्य सीख लेंगे!

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