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भाजपा के खिलाफ शिंदे गुट के ‘लेटर बॉम्ब’ से राजनीतिक भूकंप

-राज्यपाल से की गुंडई करने वाले भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और मीरा-भायंदर मनपा के ५० नगरसेवकों को निष्कासित करने की
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका में हुए हंगामे के बाद महायुति सरकार के भीतर का विवाद अब राजभवन पहुंच गया है। आधी रात को मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा के मीरा रोड स्थित सरकारी आवास में हुए हंगामे के बाद शिंदे गुट के मंत्री प्रताप सरनाईक ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र लिखकर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और ५० नगरसेवकों को पद से तत्काल हटाने और कानूनी कार्यवाही की मांग की है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी भूकंप ला दिया है। ज्ञात हो कि १६ अक्टूबर को मनपा की महासभा के दौरान मोबाइल पर वीडियो बनाने को लेकर भारी हंगामा और मारपीट हुई थी। आरोप है कि इस दौरान पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ भाजपा के नगरसेवकों द्वारा सरेआम अभद्र भाषा में गाली-गलौच और हमला किया गया।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखे अपने शिकायत पत्र में सरनाईक ने ने आरोप लगाया है कि उसी रात करीब २:३० बजे नरेंद्र मेहता अपने ४० से ५० नगरसेवकों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मनपा आयुक्त के निवास स्थान पर जा धमके। उस वक्त आयुक्त अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ घर पर थे। सरनाईक का दावा है कि पीड़ित पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भारतीय न्याय संहिता की धारा १३२ (पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा ३५३ ) के तहत सरकारी कर्मचारी पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग कर उसे ड्यूटी करने से रोकने का झूठा मुकदमे दर्ज कराने के लिए आयुक्त पर दबाव बनाकर उन्हें कथित रूप से डराया-धमकाया गया। सरनाईक ने राज्यपाल से से कानून-व्यवस्था की इस गंभीर स्थिति और ‘तानाशाही की दहशत’ की तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है।
आरोपियों को गिरफ्तार करने और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए सरनाईक ने चेतावनी दी कि यदि इन ‘गुंडई’ करने वाले जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।
भाजपा ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वे पूर्व सूचना देकर ही आयुक्त से मिलने गए थे। जो नगरसेवक घटना के वक्त मौजूद भी नहीं थे, उनका नाम पुलिस शिकायत में डालने के विरोध में वे बात करने गए थे और उस समय वहां खुद पुलिस आयुक्त भी उपस्थित थे। भाजपा विधायक मेहता ने भी इन आरोपों को झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। मांग

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