मुख्यपृष्ठस्तंभजीवन दर्पण : माता-पिता की बात मानें... जीवन व करियर उत्तम होगा

जीवन दर्पण : माता-पिता की बात मानें… जीवन व करियर उत्तम होगा

डॉ. बालकृष्ण मिश्र

काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद

गुरुजी, मेरा करियर कैसा होगा?
– मोनू
(जन्म- १९ जून २००२, समय- रात्रि १२.३० बजे, स्थान- गाजीपुर, उत्तर प्रदेश)
मोनू जी, आपका जन्म बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और आपकी राशि कन्या बन रही है। यदि आपके करियर को हम देखें तो मीन लग्न में आपका जन्म हुआ है और मीन लग्न का स्वामी बृहस्पति दशम भाव का स्वामी हो करके चौथे भाव पर बैठकर अपनी पूर्ण सप्तम दृष्टि से दशम भाव को देख रहा है। अगर आप माता-पिता का सम्मान करते हुए उनकी बात मानेंगे तभी आपका करियर बेहतर होगा, वरना आपका करियर गड़बड़ा जाएगा क्योंकि आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष भी बना हुआ है। आपकी कुंडली में कालसर्प योग होने के साथ ही आपकी कुंडली मांगलिक है। मांगलिक होने के कारण जीवन साथी के चयन में परेशानियां आएंगी। माता-पिता की बात मानते हुए यदि आप कोई भी काम करेंगे तो न केवल आपका करियर, बल्कि आपका शादीशुदा जीवन भी बेहतर होगा। वैदिक विधि से कालसर्प योग की पूजा करवाएं। जीवन के विस्तार को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, जीवन की परेशानियां कब दूर होंगी?
– अभिनव श्रीवास्तव
(जन्म- २६ जनवरी १९९१, समय- रात्रि १२.०५ बजे, स्थान- भांडुप, मुंबई)
अभिनव जी, आपका जन्म शनिवार के दिन रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है और आपकी राशि वृषभ बन रही है। वृषभ राशि का स्वामी चंद्रमा आपकी कुंडली में अष्टम स्थान पर सप्तम भाव के स्वामी के साथ में बैठ करके आपकी कुंडली को मांगलिक बनाया है, जिस कारण आपका वैवाहिक जीवन ठीक नहीं रहा होगा। अगर वर्तमान समय के बारे में हम देखें तो इस समय राहु की महादशा में मंगल का अंतर चल रहा है। राहु की महादशा १४ दिसंबर, २०२५ तक चलेगी जो आपके लिए ठीक नहीं है। अत: समय को अनुकूल बनाने के लिए आपको ४३ दिनों तक पीपल के पेड़ की परिक्रमा ५ मिनट प्रतिदिन करनी चाहिए। इसके साथ ही ४३ दिनों तक मछलियों को तालाब में चारा भी आपको डालना चाहिए। यदि ऐसा करेंगे तो धीरे-धीरे आपकी परेशानियां दूर होने लगेंगी।
गुरुजी, मेरे बेटे की राशि और उसकी कुंडली के बारे में बताएं?
– अरुण सोनवने
(जन्म- ११ अप्रैल २०२५, समय- रात्रि ७:२८ बजे, स्थान- उल्हासनगर, ठाणे)
अरुण जी, आपके बेटे का जन्म शुक्रवार के दिन हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है और उसकी राशि कन्या बन रही है। लग्न के आधार पर अगर हम देखें तो तुला लग्न में उसका जन्म हुआ है और तुला लग्न का स्वामी शुक्र है। शुक्र उच्च राशि का है, लेकिन छठे भाव पर बैठा है इसलिए शीत से उसका ज्यादा बचाव करना है। बेटे की कुंडली में १२वें भाव पर चंद्रमा बैठा है इसलिए उसे चांदी का चंद्रमा जरूर पहनाएं। कुंडली में मंगल सप्तम और धन भाव का स्वामी है, जो पिता के स्थान पर नीच राशि पर बैठ करके कुलदीपक नामक योग बना रहा है। बेटे के जन्म के बाद निश्चित ही धीरे-धीरे पिता यानी आपका विकास होगा। बेटे को चांदी का चंद्रमा पहनाने के साथ ही अगर संभव हो तो उसकी मां प्रदोष व्रत करें। इससे उसके जीवन में आनेवाली समस्याएं धीरे-धीरे दूर हो जाएंगी। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

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