– डॉ. बालकृष्ण मिश्र
जन्म २० मार्च २००२ समय रात्रि ५:४५ बजे वर्ली मुंबई
गुरुजी मेरी शादी कब होगी और मेरी कुंडली में कौन सा दोष है?
नारायण साईं
नारायण जी आपका जन्म सिंह लग्न में हुआ है। राशि आपकी वृषभ बन रही है। सिंह लग्न के लोग बड़े पुरुषार्थी और बड़े मेधावी होते हैं। अपने पुरुषार्थ से बहुत कुछ जीवन में प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन चंद्रमा ग्रह आपकी कुंडली में दशम भाव पर बैठा हुआ है जो राहु के साथ में ग्रहण योग बना रहा है। दशम भाव पर ही सप्तम भाव का स्वामी शनि भी बैठा हुआ है। चौथे स्थान पर केतु बैठ करके शंखपाल नाम का कालसर्प योग बन रहा है। इस कालसर्प योग के कारण आपका करियर स्थिर नहीं हो पा रहा है। महादशा के आधार पर अगर हम देख रहे हैं तो राहु की महादशा चल रही है। राहु की महादशा में ही केतु का अंतर चल रहा है। आपकी कुंडली में जो कालसर्प योग है उसकी पूजा विवाह से पहले करवा लेना आपके लिए आवश्यक है। २०२५ में विवाह करना आपके लिए ठीक नहीं है क्योंकि २०२६ से राहु की महादशा में शुक्र का अंतर प्रारंभ हो जाएगा। जीवन को विस्तार से जानने के लिए आप संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
जन्म २७ जनवरी २००७ रात्रि ७:३५ बजे जलगांव महाराष्ट्र
गुरु जी मेरी राशि क्या है और मेरी शादी कब तक होगी, क्या मेरी कुंडली मांगलिक है?
वंदना मांडवी
वंदना जी आपका जन्म कर्क लग्न में हुआ है और राशि आपकी वृषभ बन रही है। वृषभ राशि पर चंद्रमा बैठा हुआ है जो उच्च राशि का होता है और लग्न में ही आपकी कुंडली में शनि बैठा हुआ है। कुंडली आपकी मांगलिक नहीं है। आपकी शिक्षा बहुत अच्छी है क्योंकि शिक्षा स्थान का स्वामी मंगल है वही मंगल आपकी कुंडली में दशम भाव का स्वामी भी है। लेकिन अगर यह देखें कि आपकी शादी कब तक होगी, तो मंगल की महादशा इस समय चल रही है। शादी की बात कहीं न कहीं चल रही है लेकिन आपकी शादी २०२६ में होनी चाहिए। दूसरे स्थान पर केतु बैठा हुआ है और आठवें स्थान पर शुक्र ग्रह के साथ में राहु बैठा हुआ है इस कारण आपकी कुंडली में कुलिक नामक कालसर्प योग भी बना हुआ है। आपको इस कालसर्प योग की वैदिक पूजा करानी चाहिए। यदि यह वैदिक पूजा कराएंगी तो अच्छा लड़का भी आपको मिल जाएगा, शादी भी आपकी अच्छी हो जाएगी और वैवाहिक जीवन भी अच्छा हो जाएगा। जीवन को विस्तार से जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाना चाहिए।
जन्म २५ जुलाई १९९१ दिन ९:३५ बजे जौनपुर उत्तर प्रदेश
गुरुजी मेरे जीवन में संतान की क्या स्थिति है? कितनी संतान हो सकती हैं?
अनुराग कश्यप
अनुराग जी आपका जन्म गुरुवार के दिन और सिंह लग्न में हुआ है सिंह लग्न के लोग तो बड़े पुरुषार्थी और बड़े मेधावी होते हैं। अपने पुरुषार्थ से जगह-जमीन और हर प्रकार की सुख सुविधा प्राप्त करते हैं। यदि संतान की बात को हम देख रहे हैं तो संतान का विचार पंचम भाव से किया जाता है। पंचम भाव पर ही चंद्रमा बैठने की वजह से पहली संतान कन्या का होना आवश्यक है। अगला और पंचम भाव पर चंद्रमा ग्रह के साथ में राहु बैठा हुआ है जो ग्रहण योग भी बना रहा है। इस कारण पद्म नाम का कालसर्प योग भी बना हुआ है। इसकी भी वैदिक विधि से पूजा कराएंगे तो संतान प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा और जल्दी संतान की प्राप्ति भी हो जाएगी।
‘जीवन दर्पण’ कॉलम के तहत यदि आप अपने बारे में कुछ जानना चाहते हैं तो अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल व्हाट्सऐप नंबर ९२२२०४१००१ पर लिख भेजें।
