सामना संवाददाता / मुंबई
दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना और अनीता आडवाणी के रिश्ते को लेकर चला लंबा कानूनी विवाद अब एक बार फिर चर्चा में है। मुंबई हाई कोर्ट ने अनीता आडवाणी की वह अपील खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को विवाह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। अदालत ने माना कि यह संबंध लिव-इन रिलेशनशिप की श्रेणी में आ सकता है, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह साबित करने के लिए जरूरी कानूनी कसौटियों पर खरा नहीं उतरता।
अनीता का दावा था कि वे लगभग १० वर्षों तक राजेश खन्ना के साथ रहीं और दोनों के बीच निजी तौर पर विवाह जैसा संबंध था और यह विवाह घर के मंदिर में हुआ था। दूसरी ओर, राजेश खन्ना के परिवार डिंपल कपाड़िया, ट्विंकल खन्ना और अन्य सदस्यों ने इस दावे को अस्वीकार किया। राजेश खन्ना का डिंपल कपाड़िया से विधिक तलाक नहीं हुआ था। ऐसे में किसी दूसरे संबंध को वैध विवाह घोषित करना कानून की दृष्टि से कठिन था। पैâसले के बाद अनीता ने कहा कि १४ साल बाद भी उन्हें उनका हक नहीं मिला। उनकी लड़ाई संपत्ति या धन के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और पहचान के लिए है। उनका कहना है कि वे चुप नहीं बैठेंगी और न्याय के लिए आगे भी प्रयास करेंगी।
