-भ्रष्ट दुकानदार और स्कूलों की सांठ-गांठ बेनकाब
संदीप पाण्डेय / मुंबई
मुंबई के घाटकोपर (पश्चिम) स्थित एमजी. रोड की गोपाल लेन में चल रही `धनवंत यूनिफॉर्म’ नामक दुकान पर लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने एक बार फिर छापा मारा है। यह कार्रवाई मुंबई हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय लोकदल महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश तिवारी की शिकायत पर की गई।
डॉ. तिवारी ने आरोप लगाया है कि इस दुकान से स्कूल प्रबंधन से मिलकर अभिभावकों को घटिया क्वॉलिटी की यूनिफॉर्म बेहद महंगे दामों पर जबरन खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। यह काम एक संगठित मुनाफाखोरी तंत्र की ओर इशारा करती है, जहां स्कूल और दुकानदारों की सांठ-गांठ से गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर सीधा हमला किया जा रहा है।
यह पहला मामला नहीं है। दो वर्ष पूर्व भी डॉ. तिवारी की शिकायत पर इसी दुकान के खिलाफ लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट २००५ और पैकेज्ड कमोडिटीज नियम २०११ के तहत केस दर्ज किया गया था। उस समय मनपा शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए थे, क्योंकि ये स्कूल सरकार के ११ जून २००४ के स्पष्ट आदेश की अवहेलना कर रहे थे। इसके बावजूद न दुकान ने कोई सुधार किया, न स्कूलों ने अपनी नीति बदली। यूनिफॉर्म की अनिवार्यता को हथियार बनाकर बच्चों के नाम पर अभिभावकों से की जा रही लूट खुलेआम जारी रही।
जेल भेजने की मांग
डॉ. वेदप्रकाश तिवारी ने इस पूरे मामले को ‘शिक्षा के नाम पर संगठित लूट’ बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि नोटिस की खानापूर्ति से आगे बढ़कर दोषियों पर सीधी जेल की कार्रवाई की जाए। जब तक स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों की मिलीभगत जारी रहेगी, तब तक अभिभावकों का शोषण रुकने वाला नहीं।
स्कूलों की मान्यता रद्द करें
घाटकोपर, पवई और साकीनाका क्षेत्रों से सैकड़ों अभिभावकों ने शिकायत दर्ज करवाई है। उनकी मांग है कि इस मामले में शामिल स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए और दोषी दुकानदारों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। उनका कहना है कि यदि इस कॉर्पोरेट वसूली तंत्र को अभी नहीं रोका गया तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
