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अकोला के डॉ. सचिन खंडारे सभी को वृक्षों की छांव देना चाहते हैं

“जीवन की तपती धूप में, शीतल छांव हो तुम,
कितनी भी हो तकलीफ, तेरी छांव में सुकून जो है।”

आज के समय में ऐसे लोगों की जरूरत है जो अपने घर-परिवार, समाज, पशु-पक्षियों के साथ-साथ पर्यावरण की भी चिंता करें। सभी की भलाई की चिंता करने वालों में महाराष्ट्र के अकोला जिले के सुपुत्र, समाजसेवा के पैरोकार डॉ. सचिन बाजीराव खंडारे प्रमुख हैं। वे वह सब करने में विश्वास रखते हैं जिससे मानवता जीवित रहे। वे हर काम निस्वार्थ भावना से करते हैं, जिससे समाज का व्यापक हित हो सके।

डॉ. खंडारे पिछले कई वर्षों से वृक्षारोपण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि बढ़ती गर्मी और तापमान से लोगों को राहत मिले और हर किसी को पेड़ों की छांव मिल सके। अब तक वे पांच हजार से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं और समय-समय पर इस अभियान को आगे बढ़ाते रहते हैं। अकोला जिला हो या मुंबई उपनगर, वे वृक्षारोपण, शैक्षणिक गतिविधियों, सामाजिक कार्यों और चिकित्सा शिविरों के माध्यम से लोगों की निस्वार्थ सेवा करते हैं।

वे एमएसडब्ल्यू (समाजसेवा) में शोध कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई शोध पत्र प्रस्तुत और प्रकाशित किए हैं। वे कई विषयों में एमए और एलएलबी भी हैं। किसानों के मुद्दों पर गहन अध्ययन करने वाले डॉ. खंडारे के मन में पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है।

बचपन से ही उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सभी के प्रति मानवता का भाव रखा है। उन्होंने असंख्य विद्यार्थियों को समय पर उचित मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की है। यहां तक कि अपरिचित विद्यार्थी भी जब अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचे, तो उन्होंने अभिभावक की तरह उनकी निस्वार्थ मदद की। उनके कार्यों से प्रभावित होकर छात्र स्वयं कहते हैं कि ऐसी निस्वार्थ सहायता दुर्लभ है।

डॉ. खंडारे सादगी और उच्च विचारों के प्रतीक हैं। वे सामाजिक कार्यों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से वृक्षारोपण को बढ़ावा देते हैं। मराठी भाषी होने के बावजूद वे हिंदी भाषा के भी बड़े हितैषी हैं और महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के लिए भी उल्लेखनीय कार्य कर चुके हैं।

उनके सामाजिक कार्यों में उनकी पत्नी डॉ. निवेदिता सचिन खंडारे का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जो चिकित्सा शिविरों के माध्यम से लोगों का उपचार करती हैं। परिवार में उनके पिता बाजीराव खंडारे और स्वर्गीय माता वत्सला खंडारे के संस्कारों का गहरा प्रभाव है।

डॉ. खंडारे का मानना है कि पेड़-पौधे लगाने वाले लोग संवेदनशील और शांत स्वभाव के होते हैं। वे किसानों, मजदूरों, गरीबों, दिव्यांगों और जरूरतमंदों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और पर्यावरण के भी सच्चे हितैषी हैं।

वास्तव में, उनके कार्य यह संदेश देते हैं कि यदि निस्वार्थ भावना और समर्पण हो, तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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