– मुंबई के मेडिकल शॉप भी फेहरिस्त में शामिल
– दुकानदारों को नहीं दवा नियंत्रण विभाग का भय
– मासूमों-युवाओं के स्वास्थ्य पर छाया संकट
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मध्य प्रदेश में कफ सिरप कांड के बाद महायुति सरकार ने कफ सिरप को लेकर दो दिन पहले ही आदेश जारी कर कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद राज्य की ९० फीसदी दवा की दुकानें आज भी बिना प्रिस्क्रिप्शन के कफ सिरप बेच रही हैं। मुंबई समेत विभिन्न शहरों के दवा विक्रेता इस नियम का खुला उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि दवा नियंत्रण विभाग की ओर से कोई कार्रवाई न होने के कारण मेडिकल स्टोर संचालकों में कोई भय नहीं रह गया है। इस लापरवाही के चलते मासूमों व युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बता दें कि मध्य प्रदेश कफ सिरप कांड ने पूरे देश को हिला दिया है। सिरप पीने के बाद से बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। नागपुर और एमपी में अब तक कुल २० मासूम अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें से १८ बच्चों की मौत नागपुर में, जबकि २ की मौत मध्य प्रदेश में हुई है। मामले की जांच में पता चला है कि जो कफ सिरप बच्चों ने पिया था, उसमें जहरीला पदार्थ था। यह दवा तमिलनाडु से सप्लाई की गई थी। इस बीच मंगलवार को राज्य के औषध नियंत्रक विभाग ने राज्य के सभी खुदरा दवा विक्रेताओं को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। इसके तहत बच्चों के लिए बने कफ सिरप समेत सभी प्रकार की सिरप दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर की पर्ची दिखाने के बाद ही करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मेडिकल स्टोर चालक खुलेआम सिरप बेच रहे हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में करीब एक लाख, जबकि एमएमआर में करीब ३० हजार मेडिकल स्टोर हैं, इनमें से करीब ९० फीसदी दुकानों में बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप दिया जा रहा है।
सर्वे में सामने आई हकीकत
ऑल फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर के अध्यक्ष अभय पांडेय ने कहा कि महाराष्ट्र में कफ सिरप के अंधाधुंध वितरण ने एक बार फिर चिंता की लकीर खींच दी है। हमारे संगठन द्वारा किए गए सर्वे में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, जिसमें राज्य की अधिकांश दवा दुकानें बिना डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन के ही कफ सिरप बेच रही हैं।
हाल की घटना से नहीं लिया सबक
अभय पांडेय ने कहा कि मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई दुर्घटनाओं के बावजूद राज्य के दवा दुकानदारों ने कोई सबक नहीं लिया है। जमीनी स्तर पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग ९० फीसदी दवा विक्रेता बिना किसी चिकित्सकीय पर्ची के ही इन दवाओं को बेच रहे हैं। यह स्थिति न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।
