सामना संवाददाता / मुंबई
लगभग सभी देश शिक्षा के लिए अपने बजट में वृद्धि कर रहे हैं। खासकर रिसर्च (शोध) शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने रिसर्च शिक्षा को पीछे धकेल दिया है। रिसर्च के दौरान छात्रों को मिलनेवाले तमाम अनुदान में कटौती की गई है तो कुछ को बंद करने का प्रस्ताव आया है, जिसे लेकर रिसर्च छात्रों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है।
छात्रों ने मांग की है कि सारथी, बार्टी, महाज्योति, अमृत और आरती जैसे सभी संस्थानों द्वारा प्रदान की जानेवाली छात्रवृत्तियां बंद न की जाएं, बल्कि वह छात्रों को समय पर प्रदान की जाएं। पूरी चयन प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी की जाए और प्रत्येक संस्थान के लिए अलग-अलग विज्ञापन प्रकाशित करके फेलोशिप तुरंत लागू की जाए, लेकिन सरकार का रवैया अजीब है। आंदोलन के सातवे दिन भी न तो सरकारी अधिकारियों और न ही मंत्रियों ने कोई ध्यान दिया। इस देरी के कारण कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ गई है और प्रदर्शनकारी गुस्से में पूछ रहे हैं कि क्या सरकार अब हमारी जान ले लेगी।
पुणे के गुडलक चौक स्थित कलारक चौक पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का दौरा कर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और किसान स्वाभिमाना संगठन के नेता राजू शेट्टी ने चर्चा की। सपकाल ने कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे को फोन करके प्रदर्शनकारियों की समस्याओं के बारे में पूछा। शेट्टी ने सामाजिक न्याय मंत्री को भी फोन किया और उनसे छात्रों की मांगों पर ध्यान देने का अनुरोध किया।
