मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति की महामाया...भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ईको-सेंसिटिव जोन!

महायुति की महामाया…भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ईको-सेंसिटिव जोन!

– मंत्री पर मेहरबान हुई मीरा-भायंदर मनपा

– प्रतिबंधित क्षेत्र में दे दी निर्माण की अनुमति

प्रेम यादव / भायंदर

मीरा-भायंदर महानगरपालिका ने ईको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) क्षेत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध तरीके से निर्माण की मंजूरी दी। मीरा रोड (पूर्व) निवासी राजेश मुन्नीलाल सिंह ने इस बाबत न केवल मनपा आयुक्त को पत्र सौंपा है, बल्कि प्रमुख अभियंता (विकास नियोजन), मुंबई महानगरपालिका को भी पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है।
सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि मौजे चेना के सर्वे क्र. ९७ और ९८ पर स्थित भूखंड संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के ईको-सेंसिटिव जोन में आता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्वीकृति के बिना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मीरा-भायंदर महानगरपालिका ने विकासक और अधिकार पत्रधारक प्रताप सरनाईक को निर्माण प्रारंभपत्र और संशोधित प्रारंभपत्र जारी किए हैं। यह कदम सिंह के अनुसार साफ-साफ गैरकानूनी और नियम विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, १९८६, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, १९७२ और ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचना का खुला उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही गोवा फाउंडेशन बनाम संघ सरकार और टी.एन. गोडावरमन बनाम भारत संघ मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि ईको-सेंसिटिव जोन में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है।
पर्यावरण और वन्यजीव के लिए गंभीर खतरा
-सिंह का आरोप है कि महानगरपालिका की यह हरकत न केवल अवैध है, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर खतरा है।
– उन्होंने मांग की है कि जारी किए गए प्रारंभपत्र और संशोधित प्रारंभपत्र तत्काल निरस्त किए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों व विकासक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
-सिंह ने अपने पत्र के साथ ही विभागीय पत्र, भूखंड का सर्वे विवरण और न्यायालयीन निर्णयों की प्रतियां भी संलग्न की हैं।
-उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने आंखें मूंदकर बैठे रहना जारी रखा तो यह मामला अदालत तक ले जाया जाएगा।

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