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आर्थिक बदहाली में डूबी महायुति सरकार … ठेकेदारों के अटके १९,५०० करोड़ … राज्य में विकास कार्य हुए ठप!

भुगतान के लिए नहीं हैं पैसे

सामना संवाददाता / मुंबई
आर्थिक बदहाली में डूबी महायुति सरकार की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। इसका सबसे बड़ा झटका सार्वजनिक निर्माण विभाग और ठेकेदारों को लग रहा है। सड़क निर्माण ठेकेदारों के १९,५०० करोड़ रुपए से अधिक बिल अभी भी बकाया पड़े हैं, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। इसी के साथ ही वर्ष २०२५-२६ में एक भी नई सड़क परियोजना को शुरू नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा-विधानसभा चुनावों के पहले महायुति सरकार ने ४६,००० करोड़ रुपए के सड़क कार्यों के ठेके बांट दिए, लेकिन उनमें से १९,५०२ करोड़ रुपए के बिल आज भी लंबित हैं। जनवरी से अक्टूबर के बीच सरकार ने २०,७९९ करोड़ रुपए का भुगतान तो किया, लेकिन बकाया की गुत्थी और उलझ गई। वर्ष २०२५-२६ के वित्तीय वर्ष में २९,०४९ करोड़ रुपए बकाया थे, जबकि प्रावधान सिर्फ १२,७८५ करोड़ का किया गया। इसमें से १२,३४५ करोड़ जारी हुए, जबकि ५,५८५ करोड़ प्रक्रिया में हैं। इसके बाद भी ११,११९ करोड़ रुपए का भारी अंतर बाकी है, जिसे भरने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा।
केंद्र के आगे फैलाएगी झोली
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, अब सरकार शीतकालीन सत्र में पूरक मांगें लाने या केंद्र से ब्याज मुक्त कर्ज लेने पर विचार कर रही है। लेकिन सरकार की चरमराई आर्थिक स्थिति ऐसी है कि दोनों ही विकल्प बेहद कठिन हैं। वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की हालत ऐसी नहीं कि नई सड़कों के ठेके दे सके। उन्होंने स्वीकार किया कि वार्षिक बजट १८,००० करोड़ रुपए का होने के बावजूद चुनावों से पहले ४६,००० करोड़ के ठेके बांटने से आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।
ठेकेदार महासंघ के आरोप
महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ के अध्यक्ष मिलिंद भोसले ने चेतावनी दी कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। उनके अनुसार पीडब्ल्यूडी ही नहीं, अन्य विभागों में भी हजारों करोड़ रुपए बकाया हैं। इस वित्तीय वर्ष में एक भी नई परियोजना नहीं शुरू हुई। पूरा उद्योग ठप पड़ा है। भोसले ने चिंता जताई कि राज्य में ३ लाख से ज्यादा ठेकेदार और २ करोड़ मजदूर इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। नए ठेके न होने से ये सभी बेरोजगार होने के कगार पर खड़े हैं।

इन पर जाता है बजट का आधा हिस्सा
राष्ट्रीय और जिला सड़कों से लेकर पुल निर्माण, नाबार्ड-एडीबी कर्ज चुकौती और हाइब्रिड एन्युइटी परियोजनाओं तक बजट का आधा हिस्सा इन्हीं पर जाता है, लेकिन इस वर्ष इन फंडों को लंबित बिलों के भुगतान में झोंक देने के कारण २०२५-२६ में एक भी नई सड़क परियोजना शुरू नहीं हो सकी।

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