-उप मुख्यमंत्रियों के ठाणे-पुणे पर खास मेहरबानी
-मुख्यमंत्री फडणवीस के जिले नागपुर की अनदेखी
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महायुति सरकार का ठेका महाघोटाला अब खुलकर सामने आ गया है। जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय सरकार ने २९ अस्पतालों में १,०८१ पदों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरने का पैâसला लिया है। इसका सीधा मतलब है कि सालाना २३ करोड़ रुपए जनता के खून-पसीने के टैक्स का पैसा ठेकेदारों और दलालों की जेबों में जाएगा। यह खर्च अगले तीन वर्षों में बढ़कर ७० करोड़ रुपए से अधिक होने वाला है। इससे ठेकेदारों की चांदी हो जाएगी।
खास बात यह कि इस ‘कॉन्ट्रैक्ट खिलवाड़’ में उप मुख्यमंत्रियों के जिले ठाणे और पुणे पर विशेष मेहरबानी की गई है, जिसमें ठाणे जिले के छह अस्पतालों में ३२६ और पुणे के पांच अस्पतालों में १७७ ठेकाकर्मियों को रखा जाएगा। दूसरी तरफ हमेशा की तरह इस बार भी सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जिले की एक बार फिर से अनदेखी की गई है और यहां के अस्पतालों में केवल ८८ ठेका कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।
महायुति सरकार ने नवनिर्मित और कायाकल्पित राज्य के २९ अस्पतालों में १,०८१ कुशल व अकुशल पद बनाने का निर्णय लिया है। लेकिन इन पदों पर भर्ती सरकारी वेतन पर नहीं, बल्कि ठेका पद्धति से होगी। बुधवार को जारी शासनादेश में स्पष्ट तौर पर जिक्र किया गया है कि इन नियुक्तियों पर हर साल करीब २३.११ करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा। यह भी सिर्फ मूल खर्च है। इसमें न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुसार, बढ़ोतरी, सेवा शुल्क और जीएसटी जैसी भारी भरकम रकम अलग से जोड़ी जाएगी यानी असली बोझ जनता की जेब पर और भी ज्यादा पड़ेगा।
३ सालों के लिए होगी भर्ती
यह ठेका भर्ती तीन सालों वर्ष २०२५-२६, २०२६-२७ और २०२७-२८ तक जारी रहेगी। फिलहाल, महायुति सरकार की तरफ से तर्क दिया गया है कि इससे प्रशासनिक खर्च नियंत्रित रहेगा। लेकिन हकीकत यह है कि स्थाई रोजगार देने की बजाय सरकार ने बेरोजगार युवाओं को फिर से कॉन्ट्रैक्ट की बेड़ियों में जकड़ने का पैâसला लिया है।
सुरक्षा घोटाला, आउटसोर्सिंग पर १२० करोड़ खर्च
सरकार ने राज्य के जिला महिला व बाल अस्पताल, सामान्य अस्पताल और ग्रामीण समेत कुल ५५८ अस्पतालों में ३,०२५ सुरक्षा रक्षकों की सेवाओं की आउटसोर्सिंग करने का निर्णय लिया है। विर्त वर्ष २०२५-२६ से २०२७-२८ तक इस सेवा लेने के लिए वार्षिक १२०.०५ करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा। निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया द्वारा भर्ती की जाने वाली संस्थाओं में सेवा शुल्क लागू होगा, जबकि मेस्को सुरक्षा रक्षक मंडल या अन्य शासन मान्य सुरक्षा दलों के लिए सेवा शुल्क नहीं लगेगा।
