मनुष्य

मनुष्य एक खाली डब्बा है।
उसमें हीरा-मोती रखो या कचरा।
यह तुम पर है।
उस डब्बे पर नहीं।
मगर इतना ध्यान रखो
कि डब्बा कहीं खो न जाय
इस भीड़ में दुनिया की अचानक।
इसलिए जरूरी है उसमें रख दो
मनुष्यता समय को देखकर।।
-अन्वेषी

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