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वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा में हुआ मनोज भावुक के किताब ‘ भोजपुरी सिनेमा के संसार’ का विमोचन

आरा: वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के भोजपुरी विभाग में सुप्रसिद्ध साहित्यकार मनोज भावुक की शोध पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ का लोकार्पण किया गया। दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह ‘नाथ’ सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इस पुस्तक का लोकार्पण विभाग के पूर्व विभागाध्यक्षों प्रो. रविंद्र नाथ राय, प्रो. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, प्रो. डॉ नीरज सिंह, वर्तमान विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर पांडेय और वरिष्ठ साहित्यकार आलोचक जितेंद्र कुमार ने किया।

कार्यक्रम का आरंभ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर हुआ। विषय प्रवेश और आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. दिवाकर पांडेय ने कहा कि यह किताब भोजपुरी सिनेमा के इतिहास लेखन की अभूतपूर्व किताब है तथा यह सिनेमा पर शोध करने वाले छात्रों के लिए आधार ग्रन्थ का काम करेगी।
प्रो. रविन्द्र नाथ राय ने कहा कि यह किताब मनोज भावुक के अथक शोध और साधना का फल है। प्रो. डॉ नीरज सिंह ने कहा कि मनोज भावुक के व्यक्तित्व में प्रेम, प्रेरणा, प्रतिभा और परिश्रम का मिश्रण है। इस पुस्तक से भोजपुरी फिल्म के गौरवशाली अतीत का स्मरण होता है। जितेंद्र कुमार ने कहा कि खुशी की बात है कि दो दिन पहले 12 अक्टूबर को अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के तरफ से इस किताब पर ‘चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह सम्मान ‘ सम्मेलन के अठाइसवें अधिवेशन में 29 नवम्बर को देने की घोषणा हुई है। उन्होंने आगे कहा कि मनोज भावुक बहुआयामी साहित्यकार हैं और विद्यार्थियों को इनसे प्रेरणा लेकर भोजपुरी साहित्य में योगदान करना चाहिए।

भावुक ने कहा कि यह गर्व की बात है कि यूनेस्को में छठ पर्व की परम्परा को शामिल करने के लिए प्रयास चल रहा है। भोजपुरी एक ग्लोबल भाषा है। उन्होंने छात्रों को भोजपुरी में लेखन करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भोजपुरी की समृद्ध परम्परा में युवाओं को सृजनशील बनना पड़ेगा। वक्तव्य के दौरान उन्होंने स्वरचित गजलों और गीतों को सुनाकर सभागार को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शोधार्थियों, छात्र छात्राओं, मीडियाकर्मियों और भोजपुरी प्रेमियों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय और सफल संचालन प्रो. दिवाकर पांडेय ने किया। भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर भोजपुरी भाषा में लिखी गई यह पहली किताब है. इस पुस्तक का प्रकाशन मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली ने किया है।

‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ वर्ष 1931 से लेकर अब तक के भोजपुरी सिनेमा के सफर पर विहंगम दृष्टिपात है। वर्ष 1962 में भोजपुरी की पहली फ़िल्म आई- ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’। उसके पहले 1931 से 1962 तक हिंदी सिनेमा में संवाद और गीतों के जरिये भोजपुरी कैसे अपना परचम लहराती रही, इसके रोचक किस्से भी हैं इस पुस्तक में। अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, राकेश पांडेय, कुणाल सिंह, रवि किशन और मनोज तिवारी जैसी सिने-हस्तियों के साक्षात्कार शामिल हैं, भोजपुरी सिनेमा की चुनौतियों, संभावनाओं, बिजनेस और भविष्य पर खुलकर लिखा गया है। साथ ही ओटीटी, भोजपुरी वेबसिरिज, टेलीफिल्म, सीरियल पर भी प्रकाश डाला गया है। भावुक भोजपुरी सिनेमा और भोजपुरी साहित्य के बीच की एकमात्र मजबूत कड़ी हैं। दोनों को जीते हैं, दोनों में काम करते हैं। इसलिए दोनों को बखूबी समझते हैं।

हाल ही में मनोज भावुक की एक फिल्म रिलीज हुई है जिसका नाम है – आपन कहाये वाला के बा। इस फिल्म के सभी गीत मनोज भावुक ने लिखा है। इन गीतों से आपको शैलेन्द्र, मजरूह सुल्तानपुरी और अंजान के दौर के गीतों की याद ताजा हो जाती है। लोकार्पित पुस्तक ‘ भोजपुरी सिनेमा के संसार’ भावुक की तीन दशकों की तपस्या का प्रतिफल है। भावुक 1995 से ही अनवरत भोजपुरी सिनेमा पर लिख रहे हैं।

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