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एंट्री से पहले ही मायावती ने भतीजी दीपिका को बसपा से किया आउट!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अलर्ट मोड में आ चुकी हैं, लेकिन बसपा प्रमुख मायावती पारिवारिक कलह में उलझी पड़ी हैं। भतीजी और भतीजे को लेकर सुनाए गए अंतिम फैसले को बसपा प्रमुख मायावती ने एक बार फिर बदल दिया है। बसपा में भतीजी दीपिका की एंट्री से पहले ही मायावती ने उन्हें पार्टी से आउट कर दिया। रविवार को मायावती ने कहा कि अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और उनकी बेटी दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, परिवार में से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती का यह फैसला 12 सितंबर को किए गए उनके उस ‘पारिवारिक फैसले’ के आठ दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे (आकाश और ईशान) को पार्टी में छोटे या बड़े किसी भी पद पर रहते हुए राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा था, ‘मेरा अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा है कि आनंद कुमार के खासकर किसी भी बेटे को बसपा में किसी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।’ मायावती ने यह भी कहा था कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। लेकिन महज आठ दिन के अंदर ही मायावती ने अपना फैसला बदल दिया और भतीजी के बसपा में आने से पहले ही उन्हें आउट कर दिया।
मायावती ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गंभीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार में से किसी भी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।’ यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘शादी के बाद से आकाश आनंद का कदम-कदम पर ऐसा रवैया और गतिविधियां रही हैं, जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।’ उन्होंने दावा किया कि अब आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के ‘जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं’। उन्होंने कहा कि आकाश को अब पार्टी में वापस लेना बसपा के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात होगा और वह ऐसा कभी नहीं करेंगी। मायावती ने कहा, ‘अब ऐसे में आनंद कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूं या न करूं, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गंभीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है।’
मायावती ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से ‘संन्यास’ लेने की घोषणा के बाद 10 सितंबर को अपने भतीजे एवं सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया था। उन्होंने इससे पहले सिद्धार्थ को भी बसपा से बाहर कर दिया था। बसपा सूत्रों के अनुसार, आनंद कुमार पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। मायावती ने उन्हें 2017 में पहली बार इस पद पर नियुक्त किया था और उस समय यह शर्त रखी थी कि वह कभी सांसद, विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मायावती ने तब कहा था कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों में से किसी को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे।

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