मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स: जदयू में ‘अपनों’ की जंग!

पटना की पॉलिटिक्स: जदयू में ‘अपनों’ की जंग!

बिहार में चुनावी गर्मी बढ़ने के साथ जनता दल यूनाइटेड का अंदरूनी टकराव भी खुलकर सामने आ गया है। मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नीरज कुमार को चुनाव नहीं जीतने देने की बात कही है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद नया नहीं है, लेकिन विधान परिषद चुनाव ने पुराने मतभेदों को फिर सतह पर ला दिया है। अनंत सिंह ने नीरज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जवाब में नीरज कुमार ने आरोपों को चुनौती देते हुए प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है। इस तरह मामला बयानबाजी से आगे बढ़कर सार्वजनिक टकराव तक पहुंच गया है।
एक उम्मीदवार, दो खेमे
रिपोर्टों के अनुसार, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के मुकाबले किसी दूसरे उम्मीदवार के समर्थन का संकेत भी दिया है। यदि यह मतभेद चुनावी मैदान में प्रभावी हुआ तो जदयू के स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपने ही दल के भीतर विरोध झेलना पड़ेगा।
संजय झा का ‘डैमेज कंट्रोल’
विवाद बढ़ने के बाद जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बड़े मतभेद से इनकार करते हुए मामला सुलझाने की कोशिश शुरू की है। विधान परिषद चुनाव उम्मीदवारों के साथ संगठन की एकजुटता की भी परीक्षा होता है। फिलहाल जिस चुनाव में मुकाबला विपक्ष से होना था, वहां जदयू के दो प्रमुख चेहरे ही आमने-सामने हैं। पार्टी नेतृत्व के लिए इस अंदरूनी लड़ाई को रोकना बड़ी चुनौती बन गया है।
घर के अंदर ‘कारखाना’, बाहर शराबबंदी!
बिहार में शराबबंदी के बीच राजधानी पटना के गोपालपुर थाना क्षेत्र स्थित जकरियापुर में नकली विदेशी शराब बनाने की कथित पैâक्ट्री पकड़ी गई है। उत्पाद विभाग की छापेमारी में एक मकान से शराब बनाने की मशीन, खाली बोतलें, ब्रांडेड रैपर, ढक्कन और तैयार शराब बरामद हुई। मुख्य आरोपी फरार है। यह अकेला मामला नहीं है। गोपालगंज में गंडक नदी के रास्ते ले जाई जा रही ५७४ लीटर शराब के साथ एक आरोपी पकड़ा गया था। नाव और वाहन जब्त हुए थे। कटिहार के एक पोल्ट्री फार्म से भी ३८१ लीटर विदेशी शराब मिली थी। घर, फार्म और नदी, शराब तस्करों ने हर जगह नया रास्ता खोज लिया है। लगातार हो रही बरामदगी पूछती है कि शराबबंदी ने कारोबार रोका या उसे केवल भूमिगत कर दिया?
मृत मजदूर भी ‘जिंदा’!
बिहार में मृत निर्माण मजदूरों को पहले रिकॉर्ड में जीवित दिखाकर लेबर कार्ड बनाने और फिर फर्जी दस्तावेजों से मृत घोषित कर सहायता राशि हड़पने के आरोप सामने आए हैं। पटना सहित कई जिलों से मिली शिकायतों में कुछ श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। कल्याण बोर्ड में ४३ लाख से अधिक मजदूर पंजीकृत हैं। सामान्य मृत्यु पर दो लाख और दुर्घटना में मृत्यु पर चार लाख रुपये तक सहायता मिलती है। वर्ष २०२५-२६ में बोर्ड ने १५,४८,६५८ लाभार्थियों को १,११९.८३ करोड़ रुपए बांटे, जबकि ७५५.५६ करोड़ रुपए उपकर मिला। विभाग जांच की तैयारी में है। अब सवाल है। गरीब मजदूरों का पैसा आखिर किसकी जेब में गया?

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