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मेट्रो लाइन-९ ने बिगाड़ा सड़कों का हुलिया…दहिसर से भायंदर तक गड्ढों में डूबीं सड़कें!

-हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर पैâसला रखा सुरक्षित

प्रेम यादव / भायंदर

मीरा-भायंदर शहर में मेट्रो निर्माण कार्य के चलते सड़कों पर बने गड्ढों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर शनिवार को मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई। अदालत ने इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
गो ग्रीन फाउंडेशन ट्रस्ट के विरभद्र कोनापुरे ने दायर याचिका में कहा है कि दहिसर चेकनाका से भायंदर तक मेट्रो लाइन-९ के काम के कारण सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनकी वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं और ट्रैफिक जाम आम हो गया है।
गौरतलब है कि इसी मार्ग पर एमएमआरडीए ने तीन साल पहले २२ करोड़ रुपए से अधिक की लागत से मैस्टिक अस्फाल्ट तकनीक से डामरीकरण कराया था। पांच साल की वारंटी अवधि होने के बावजूद सड़क हर साल उखड़ जाती है। साफ है कि काम घटिया दर्जे का हुआ और अधिकारी व ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के पैसों की बर्बादी की गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। यह मामला प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है।
जान जोखिम में डालकर चल रहे हैं लोग
 ठेकेदारों को संरक्षण- करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़कों की हालत बद से बदतर है। जिम्मेदार विभाग आंख मूंदकर बैठे हैं और ठेकेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है।
 की जा रही बहानेबाजी- जनता रोज इन गड्ढों में अपनी जान जोखिम में डाल कर चल रही है, लेकिन जवाबदेही तय करने के बजाय बहानेबाजी की जा रही है।
 हाई कोर्ट पर टिकी निगाहें- अब देखना यह होगा कि उच्च न्यायालय का आगामी पैâसला प्रशासन को झकझोर कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाता है।

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