दीपक तिवारी / विदिशा
लटेरी में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की वजह से बच्चे की मौत के बाद बवाल मचा हुआ है। कलेक्टर के निर्देश पर झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें बंद कराई जा रही हैं। ऐसे में जिला आयुष विभाग की निष्क्रियता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक हैं?
आयुष विभाग विदिशा जिले में हर मोर्च पर निठल्ला साबित हो रहा है। चाहे केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की बात हो या उनके प्रचार-प्रसार की। हर जगह विभाग असफल है। तो वहीं झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई में भी जिला आयुष विभाग की कोई भूमिका नजर न आना विभाग को कठघरे में खड़ा करता है। जबकि शासन की ओर से झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए बनाई गई टीम में जिला आयुष अधिकारी को पहले से ही शामिल किया गया है, लेकिन इस विभाग द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

झोलाछाप डॉक्टरों की जांच टीम में जिला आयुष अधिकारी को भी शामिल होना चाहिए, क्योंकि शासन का आदेश पूर्व से है। इधर 8 महीने पहले आयुष विभाग द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई न करने के संबंध में प्रमाण सहित कलेक्टर विदिशा को लिखित शिकायत की गई थी। काश इस शिकायत को रद्दी की टोकरी में न फेंका होता तो आज लटेरी का मासूम बच्चा अपने माता-पिता की गोद में खेल रहा होता। लेकिन आम जनता के दर्द को समझने वाला कोई नहीं है।
वहीं जिला आयुष अधिकारी कार्यालय में पंजीकृत चिकित्सकों की सूची नहीं है। यह बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला है। यह जानकारी आरटीआई से मिली है। सवाल उठता है कि जब आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा के विदिशा जिले के रजिस्टर्ड के डाक्टरों की सूची आयुष विभाग के पास नहीं है तो फिर विभाग बनाया किसलिए और लाखों का वेतन और सुविधाएं किसलिए दी जा रही हैं? झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी वैद्य आम जनता को खुलेआम लूट रहे हैं। उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और जिला आयुष विभाग तमाशा देख रहा है। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से कानून व्यवस्था बिगड़ने के लिए सीएमएचओ के साथ जिला आयुष अधिकारी भी बराबर जिम्मेदार हैं।
