सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका के दोहरे रवैये के कारण स्वास्थ्य सेवा कर्मचारी और आशा कार्यकर्ताओं को भारी नुकसान हो रहा है। उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। दरअसल, मुंबई मनपा के आगामी चुनाव कार्यों के लिए प्रशासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों (सीएचवी) और आशा कार्यकर्ताओं को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में नियुक्त किया है।
हालांकि, मुंबई मनपा द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर हलफनामे के अनुसार, सीएचवी और आशा कार्यकर्ता मनपा के कर्मचारी नहीं हैं इसलिए मुंबई के ४,५०० कार्यकर्ताओं ने बूथ लेवल ऑफिसर के रूप में काम करने से सीधे इनकार कर दिया है, उनका दावा है कि उन्हें चुनाव कार्य करने की आवश्यकता नहीं है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ नियुक्ति के लिए दी गई सूची में शामिल १३ संवर्गों में सीएचवी और आशा कार्यकर्ता शामिल नहीं हैं। वे मुंबई मनपा के कर्मचारी नहीं हैं। साथ ही कुछ सीएचवी और आशा कार्यकर्ता राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं इसलिए सीएचवी और आशा कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्हें बीएलओ के रूप में नियुक्त करना अनुचित है। मुंबई महानगरपालिका के कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, सीएचवी और आशा सेविकाएं मुंबई महानगरपालिका के स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं।
जबरन थोपी जा रही बीएलओ की जिम्मेदारी
सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सीएचवी और आशा सेविकाएं स्वास्थ्य कार्यकर्ता नहीं, बल्कि स्वयंसेवक हैं।
वे महानगरपालिका के कर्मचारी भी नहीं हैं इसलिए सीएचवी और आशा सेविकाएं बीएलओ के रूप में नियुक्ति के योग्य नहीं हैं।
मुंबई मनपा चुनाव आयोग को गलत जानकारी देकर सीएचवी और आशा कार्यकर्ताओं को बीएलओ के रूप में नियुक्त कर रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।
सीएचवी और आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह नियुक्ति अवैध है और सीएचवी और आशा कार्यकर्ताओं पर जबरन थोपी जा रही है।
कार्यकर्ताओं की बीएलओ के रूप में जबरन और अवैध नियुक्ति को रद्द करने का अनुरोध किया है।
