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2026 में पानी की किल्लत से मिलेगी राहत, तानसा और मोदक झीलों में भरा मुंबई का जल भंडार

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई हर साल गर्मियों में पानी की कमी से जूझती है। बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को परेशान होते देखना यहां आम बात रही है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, हाल की बारिश ने मुंबई की सात झीलों को लगभग पूरी तरह भर दिया है। खासतौर पर तानसा और मोदक सागर झीलें पानी से लबालब हो चुकी हैं। यही कारण है कि 2026 में मुंबईकरों को पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, सातों झीलों का जलस्तर 99 प्रतिशत तक पहुँच गया है। इनमें से अपर वैतरणा, तानसा, मध्य वैतरणा और मोदक सागर बांध सीधे भांडुप पंपिंग स्टेशन तक पानी पहुँचाते हैं। वहाँ से पानी शुद्ध कर मुंबई के घर-घर तक भेजा जाता है। ये चार बांध शहर की कुल जल आपूर्ति का लगभग 50 प्रतिशत देते हैं, जबकि शेष 50 प्रतिशत पानी भाटसा बांध से आता है।

मुंबई की प्यास बुझाने की इस अद्भुत प्रक्रिया में तानसा बांध की खास भूमिका है। भांडुप पंपिंग स्टेशन से लगभग 60 किलोमीटर दूर मध्य वैतरणा और मोदक सागर का पानी भांडुप तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद पानी शुद्ध होकर मुंबई के विभिन्न इलाकों में पहुँचता है। अनुमान के मुताबिक, शहर को प्रतिदिन करीब 4000 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आवश्यकता होती है, और वर्तमान जलस्तर इस मांग को पूरा करने में पर्याप्त है।

भविष्य की योजनाएँ
मुंबई नगर निगम के जल अभियंता पुरुषोत्तम मालवड़े ने बताया कि आने वाले समय में जल प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। भूमिगत पाइपलाइनों में रिसाव रोकने के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है। सड़कों पर सीमेंट कंक्रीट के इस्तेमाल से भी पानी का नुकसान कम हुआ है।

इसके अलावा, बढ़ती आबादी की ज़रूरतें पूरी करने के लिए गरगई बांध का प्रस्ताव भी तैयार है। इसके लिए कुछ मंजूरियाँ अभी लंबित हैं, लेकिन इसके बन जाने पर मुंबई को रोजाना 440 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलेगा। वहीं अब तक 22,000 नए पानी कनेक्शन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे पानी की चोरी पर भी रोक लगी है। अधिकारियों का दावा है कि इन उपायों के चलते मुंबईकरों को आने वाले साल में पानी की चिंता नहीं करनी होगी। बारिश से भर चुके बांध और भविष्य की योजनाएँ, दोनों मिलकर शहर की प्यास बुझाने के लिए तैयार हैं।

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