सामना संवाददाता / मीरा-भायंदर
मीरा-भायंदर के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (जूनियर डिविजन) की अदालत ने भले ही बिल्डर उमराव सिंह ओस्तवाल को ५० हजार के जात मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया हो, लेकिन देर से ही सही मीरा-भायंदर महानगरपालिका ने उसके खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बता दें कि फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी से संबंधित एक मामले में एफआईआर दर्ज होने के तीन महीनों बाद अंतत: मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और क्राइम ब्रांच ने बिल्डर उमराव सिंह ओस्तवाल को ३० अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था। दो दिनों की पुलिस रिमांड के बाद ओस्तवाल को सोमवार को अदालत के सामने पेश किया गया, जहां उसे ५० हजार के जात मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया गया। मेसर्स श्री ओस्तवाल बिल्डर्स लिमिटेड के मालिक उमराव सिंह ओस्तवाल सहित कुलदीप सिंह ओस्तवाल और चार अन्य लोगों पर नया नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा ४२० (धोखाधड़ी), ४०६ (विश्वासघात), ४६५ (दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़), ४६६ (जालसाजी), ४६८ (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), ४७१ (जाली दस्तावेजों का उपयोग), ४७२ (जालसाजी करने के इरादे से नकली मुहर का उपयोग) एवं (जाली दस्तावेज होने का ज्ञान होते हुए धोखा देने का अपराध) के तहत १६ मई, २०२५ में मामला दर्ज किया था। बाकी के आरोपी अब तक फरार बताए जा रहे हैं। मामले की जांच का जिम्मा आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा गया था। शिकायतकर्ता रंजीत झा जो आरोपियों द्वारा निर्माणित ओस्तवाल पैराडाइस (बिल्डिंग क्रमांक ६) की हाउसिंग सोसाइटी में सचिव पद पर कार्यरत हैं, ने पुलिस को दिए बयान के अनुसार, आरोपी बिल्डर ने २००६ में फ्लैट के बिक्री एग्रीमेंट में अपने लेआउट में चार रिहायशी और एक शॉपिंग सेंटर की जानकारी दी और सन २००८ में चार अलग हाउसिंग सोसाइटी का पंजीकरण करवाया। मामला २०१५ में तब सामने आया जब सोसायटी के पदाधिकारी अपनी इमारतों का डीम कन्वेअंस करने हेतु दस्तावेज इकट्ठा करने लगे। पता चला कि बिल्डर ने न सिर्फ तीन मंजिलों का निर्माण अवैध रूप से किया था, बल्कि सोसाइटी की मंजूरी लिए बिना फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पॉटेंटीयल (एक्स्ट्रा) फ्लोर स्पेस इंडेक्स का दुरुपयोग कर एक और इमारत (क्र ९) का निर्माण शुरू कर दिया। ओस्तवाल और अन्य आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत कथित रूप से फर्जी सुधारित निर्माणकार्य अनुमति और जाली नक्शा बनाकर न सिर्फ अवैध फ्लैट्स को बेचकर खरीदारों को करोड़ों का चूना लगाया, बल्कि मनपा के साथ भी धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए मनपा आयुक्त ने नगर रचना विभाग से श्री ओस्तवाल बिल्डर्स लिमिटेड से संबंधित प्रोजेक्ट्स के दस्तावेजों के जांच के आदेश दिए हैं। ज्ञात हो कि इससे पहले भी ओस्तवाल बिल्डर पर अवैध निर्माण करने के अलावा १३ मामले पुलिस थानों में दर्ज हैं।
