मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : हूतियों के खिलाफ एक और मुस्लिम मुल्क की एंट्री!

मुस्लिम वर्ल्ड : हूतियों के खिलाफ एक और मुस्लिम मुल्क की एंट्री!

-सूफी खान
-यमन जंग में अब कौन कूदा?
इतिहास फिर से खुद को दोहराने जा रहा है। यमन जंग का दायरा बढ़ रहा है, इसमें वो ताकतें भी शामिल होती जा रही हैं जो पहले भी यमन में उलझ चुकी हैं और मुंह की खा चुकी हैं। हम बात कर रहे हैं मिस्र या इजिप्ट की। रिपोर्ट की मानें तो मिस्र ने दो सी-वन-३० एच मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयर क्राफ्ट सऊदी अरब के ताइफ में किंग फहाद एयरबेस पर उतार दिए हैं। इतना ही नहीं, मिस्र की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने सऊदी अरब को हर मुमकिन मदद देने का भरोसा दिया है। हालांकि, एयर क्राफ्ट लैंडिंग की खबर की तस्दीक नहीं की जा सकती, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए छन कर आ रही खबरों पर यकीन करें तो मिस्र भी इस जंग में किसी न किसी रूप में शामिल हो रहा है। ताइफ शहर सऊदी अरब के वेस्ट में मौजूद है और रेड सी के करीब है।
ऐसे वक्त में जबकि हूती सऊदी के अंदर टार्गेट की लगातार धमकी दे रहे हैं बल्कि एयरपोर्ट को भी निशाना बना रहे हैं, लग रहा है कि एक बड़ी और आधुनिक सेना रखने वाला मिस्र आगे आया है। मिस्र सऊदी अरब को पूरी तरह मिलिट्री सपोर्ट देने जा रहा है तो फिर इसका असर सिर्फ सऊदी हूती जंग तक ही महदूद नहीं रहेगा। इससे रेड सी और इसके आसपास के इलाके में पहले से ही मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। बड़ा सवाल ये भी है कि मिस्र क्या सऊदी अरब को सिर्फ मिलिट्री सपोर्ट कर रहा है या आगे चलकर सऊदी के लिए खुद इस जंग का हिस्सा बनेगा? ये अहम सवाल है।
मिडिल ईस्ट के जानकार तो ये भी बताते हैं कि बाब-अल-मंदेब पर जिस तरह से हूतियों का शिकंजा कस रहा है उससे सऊदी के साथ-साथ मिस्र या इजिप्ट को आगे बड़ी तकलीफ हो सकती है। बाब-अल-मंदेब बंद होगा तो मिस्र में स्वेज नहर से कारोबार बंद होगा। अगर सऊदी हूतियों के खिलाफ बड़ी बमबारी करता है तो मिस्र इसमें उसे अपने फाइटर प्लेन के साथ ज्वाइन कर ले। मिस्र सीधे सऊदी की मदद के लिए तो नहीं आएगा लेकिन ऐसे सपोर्ट कर सकता जिससे मिस्र को मिले अमेरिकी फाइटर प्लेन का भी टेस्ट हो जाएगा कि वो किस हद तक काम करते हैं। लेकिन इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है। दरअसल १९६२ से १९६८ के दौरान नॉर्थ यमन के सिविल वॉर में मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने यमन में अपनी सेना भेजी थी। उस समय मिस्र का सऊदी अरब के साथ टकराव हुआ था क्योंकि सऊदी अरब यमन के शाही गुट का समर्थन कर रहा था। लेकिन उस समय मिस्र यमन में पस गया था और ये जंग उसके लिए वियतनाम की तरह साबित हुई थी। अब अगर हूतियों के खिलाफ मिस्र सऊदी का साथ दे रहा है तो कहीं ये उसके लिए फिर बड़ी भूल साबित न हो जाए, इस पर चर्चा का बाजार गर्म है।

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