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मुस्लिम वर्ल्ड : इजरायल से लड़ने के लिए ‘अरब फौज’ …मुस्लिम देशों का तगड़ा प्लान!

सूफी खान

कतर की राजधानी दोहा पर हुए इजरायली हमले के बाद अरब देश एकजुट होते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि दोहा पर हमला करके इजरायल ने एक बड़ी भूल कर दी है और इस भूल का उसे बड़ा खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।
गाजा, फिर लेबनान, वेस्ट बैंक, सीरिया, यमन और ईरान। इजरायल ने हर जगह हमले किए, लेकिन इन हमलों से किसी को कोई खास फर्क नहीं पड़ा। लेकिन जैसे ही इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में बम गिराया, वैसे ही अरब खित्ते का पूरा समीकरण बदल गया। कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर इजरायल घिर गया है। दोहा पर किए गए अटैक को लेकर इजरायल का दावा है कि टारगेट हमास के लीडर थे, लेकिन नेतन्याहू ने इसी हमले से अरब में नए संग्राम की नींव रख दी है।
कतर पर हमले के बाद बनी स्थिति में अरब के ज्यादातर देशों ने इजरायल का विरोध किया है। हमले को क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बताया। हालांकि, प्रेसिडेंट ट्रंप ने इस विषय पर मध्यस्थता की कोशिश भी की, लेकिन पीएम नेतन्याहू का गुस्सा और ज्यादा ही भड़क गया।
पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमास के सरगना कतर में रह रहे हैं। उन्हें गाजा के लोगों की परवाह नहीं है। वो युद्ध अंतहीन बनाने की कोशिश में हैं। उन्होंने युद्ध विराम की कोशिश को रोका है। उनसे छुटकारा पाकर ही समस्या खत्म होगी। हमारे सभी बंधकों की रिहाई हो जाएगी। शांति स्थापना की मुख्य बाधा दूर होगी।
देखा जाए तो नेतन्याहू ने सीधे संकेत दिए हैं कि आगे भी कतर में हमास के ठिकानों पर हमले से इजरायल गुरेज नहीं करेगा। वहीं इन हमलों के बाद ट्रंप भी काफी नाराज और गुस्से में हैं। ट्रंप की नाराजगी के पीछे रणनीतिक समीकरणों में अचानक आ रहे बदलाव को भी कारण माना गया है। ये बदलाव आया है, एकजुट हो रहे अरब की वजह से। इजरायली हमले के बाद इस्लामिक देशों ने दोहा में एक सम्मेलन किया। इस सम्मेलन में इजरायल के हमले की सभी ने मिलकर निंदा की और सुरक्षा के लिए इस्लामिक देशों को एकजुट होने का प्रस्ताव भी रखा। इस प्रस्ताव पर सभी अरब और इस्लामिक देश एकमत नजर आए, जिसमें इजिप्ट ने ९ साल पहले लाए गए नाटो जैसे संगठन को बनाने के प्रस्ताव को दोबारा दोहराया है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने कहा कि हमें संयुक्त अरब सेना स्थापित करना ही होगा। ये संयुक्त सेना नाटो की तरह काम कर सकेगी, जिससे हमले के शिकार किसी भी अरब राज्य की रक्षा करना आसान होगा। संकेत साफ है कि इजरायल की वजह से अरब पर अमेरिका की पकड़ अब ढीली पड़ रही है और नेतन्याहू के आक्रामक तेवर अरब के सैन्य गठबंधन को बहुत जल्द साकार कर सकते हैं और ये इजरायल के साथ-साथ अमेरिका के लिए भी खतरे की घंटी हो सकता है।

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