सूफी खान
-क्या लेबनान में बेबस हो गया इजरायल?
इजरायल भले ही जिद पर अड़ा था, लेकिन अब जमीनी हकीकत ये है कि साउथ लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल को हमले बंद करने पड़े हैं। २३ जून मंगलवार वो दिन था जिस दिन ना तो इजरायल ने साउथ लेबनान में हिजबुल्लाह पर अटैक किया और ना ही हिजबुल्लाह की तरफ से कोई एक्शन हुआ। ईरान-अमेरिका पीस डील का जब मसौदा तय हो रहा था तो ईरान ने साफ कह दिया था कि वो डील को तब ही मानेगा, जब लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमले रुकेंगे। लेकिन नेतन्याहू मान ही नहीं रहे थे। हिजबुल्लाह भी साउथ लेबनान से इजरायल को भरपूर जवाब दे रहा था।
लेकिन आखिरकार इजरायल के हाथ बंध गए हैं। उसकी वजह ईरान की फील्डिंग रही। स्विट्जरलैंड में जब ईरान-अमेरिका के बीच बात हो रही थी तो ईरान का डेलिगेशन इसलिए भी उठकर बाहर निकल गया था क्योंकि इजरायल लेबनान पर हमले रोक नहीं रहा था। ट्रंप का धमकी वाला बयान भी आया, जिसमें कहा गया था कि ईरान अगर अपने प्रॉक्सी हिजबुल्लाह को रोकता नहीं है, तब हम ईरान पर दोबारा हमला करेंगे। दरअसल, इजरायल को नहीं समझा पा रहा अमेरिका और ईरान पर दबाव बना रहा था कि वो हिजबुल्लाह को रोके। मगर ईरान की शर्त यही थी कि डील में लेबनान में पूरी तरह से जंगबंदी शामिल होना चाहिए।
जब तक ये पॉइंट नहीं सुलझेगा तब तक ईरान आगे बात करेगा ही नहीं। इसके बाद ट्रंप ने बयान दिया कि मैं पीएम नेतन्याहू को समझा दूंगा, मुझे उन्हें समझाना आता है। फिलहाल, लेबनान में एक बड़ा हिस्सा कंट्रोल में लेने का इजरायल का प्लान फेल होता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि इजरायल अपने कुछ फौजी वापस बुला चुका है और आईडीएफ के और भी सैनिक वापस बुलाए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट तो ये भी कह रहे हैं कि ये ईरान के दबाव का नतीजा होगा कि अगले ६० दिनों के दौरान इजरायल को अपनी पूरी आर्मी लेबनान के करीब से हटानी पड़ जाए। अब हिजबुल्लाह और इजरायल में लड़ाई तब ही हो सकती है जब ईरान और अमेरिका में डील टूट जाए। ईरान ने इजरायल के हाथ बंधवा दिए हैं।
