सूफी खान
पाकिस्तान की फौजें गाजा पहुंचने जा रही हैं। पाकिस्तान इंटरनेशनल पीस मिशन के तहत गाजा में अपनी सेना भेजने के लिए तैयार हो गया है। प्रेसिडेंट ट्रंप के २० सूत्रीय गाजा पीस डील प्रस्ताव के तहत ही ये अमल किया जा रहा है। इसके मुताबिक, अन्य मुस्लिम देशों के साथ ही पाकिस्तानी सुरक्षा बल भी गाजा में स्टेब्लाइजेशन फोर्स के तौर पर मौजूद रहेंगे। पाकिस्तान ने ये भी साफ कर दिया है कि उसकी फौजें गाजा में रहेंगी, लेकिन हमास के साथ न तो उनका कोई मुकाबला होगा और न ही वो हमास को हथियार डालने के लिए किसी भी तरह से फोर्स करेंगे।
पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर इशाक डार ने ये बात साफ कर दी है कि हमास को डिसआर्म करने का मुद्दा अलग है और ये बात पहले भी उठी थी, लेकिन पाकिस्तान का इससे कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर शहबाज शरीफ ने फील्ड मार्शल से मशविरा करने के बाद ये पैâसला लिया है, जिसके तहत वो दीगर मुस्लिम देशों के साथ अपनी फौज भी गाजा भेजेगा। इसी तरह सबसे ज्यादा आबादी वाले मुस्लिम देश इंडोनेशिया ने तो गाजा में अपने २० हजार सैनिक भेजने का पैâसला किया है।
पिछले दिनों यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल ने गाजा में हालात को सामान्य करने के लिए ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसमें आईएसएफ की तैनाती को भी अधिकार दिया गया था। पाकिस्तान समेत १३ सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाए रखी। वहीं दूसरी तरफ हमास ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। खासतौर पर उस बात को जिसमें उससे हथियार डालने की बात कही गई है। उसके लिए हमास का साफ कहना है कि टू स्टेट सॉल्यूशन के बगैर वो हथियार नहीं छोड़ेगा। वहीं पाकिस्तान ने भी साफ कर दिया है कि हमास को डिसआर्म करने का मुद्दा पहले सऊदी अरब के रियाद में दो-राज्य समाधान पर हुई बातचीत के दौरान उठा था। उस समय पाकिस्तान इस तरह के किसी भी प्रयास में भाग नहीं लेगा, ये बात साफ हो गई थी। पाकिस्तान का कहना है कि हमारा रोल शांति स्थापना का है और उसके लिए पाकिस्तान की सरकार ने बाकायदा तौर पर अपने सैनिक भेजने का पैâसला कर लिया है।
पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है। ऐसे में हमास को लेकर उसका कोई भी प्रेशर वहां की अवाम में गुस्सा पैदा कर सकता है। पाकिस्तान की जनता फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर जज्बाती है। यही वजह है कि गाजा में फोर्स भेजने के पैâसले के साथ ही पाकिस्तान ने ये भी साफ कर दिया है कि वो किसी भी हाल में हमास को डिसआर्म करने के प्रयास में कोई भूमिका नहीं निभाएगा। पाकिस्तान समेत और भी कई मुस्लिम बहुल या इस्लामिक मुल्क गाजा में अपनी सेना भेजेंगे। वो यहां शांति प्रक्रिया में अहम रोल अदा करेंगे। इसके बाद अगला स्टेप इजरायल और हमास की सहमति से उठाया जाएगा। जहां तक हमास के गाजा से बाहर जाने का सवाल है तो वो साफ कह चुका है कि वो गाजा से कहीं नहीं जाएगा। हां, प्रस्ताव के मुताबिक मुस्लिम देशों की सेनाएं अपना काम करें। लेकिन इस बीच इजरायल ने किसी भी तरह से सीजफायर को तोड़ा तो हमास भी सख्त जवाब देगा। इधर ईरान की राजधानी तेहरान में तुर्की, सऊदी और ईरान के लीडर्स और अधिकारी जुटे हैं। उनकी इस मुलाकात ने मिडिल ईस्ट की सियासी हलचल को तेज कर दिया है। तीनों मुल्कों की मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है, जब इजरायल ने सीरिया और लेबनान पर हमले बढ़ा दिए हैं और इजरायली मीडिया ने फिर से ईरान पर अटैक करने की खबरें चलाना तेज कर दिया है।
खबर तो ये भी है कि तीनों के दरमियान डील भी साइन हुई है। एक्सपर्ट कहते हैं कि मिडिल ईस्ट में स्थाई शांति में अभी देरी हो सकती है। इस नई हलचल को ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के उस बयान से भी जोड़ा जा रहा है, जो वो अक्सर देते हैं, जिसमें वो मुस्लिम बहुल बड़े और ताकतवर देशों से एक साथ एकजुट होकर इजरायल का मुकाबला करने का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, तुर्की और ईरान ने इस मुलाकात को रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के लिए हुई मुलाकात बताया है।
